संयुक्त राष्ट्र द्वारा बैन किए गए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अब अपना नेटवर्क बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। संगठन ने हाल ही में महिलाओं के लिए एक ऑनलाइन कोर्स शुरू किया है, जिसका नाम है ‘तुफत अल-मुमिनात’। इस कोर्स में महिलाओं को कथित “धार्मिक शिक्षा” और “जिहाद का सिद्धांत” सिखाया जा रहा है। हर महिला से इसमें शामिल होने के लिए 500 रुपये डोनेशन लिया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि यह कोर्स सिर्फ पैसे जुटाने के लिए नहीं है, बल्कि जैश की महिला ब्रिगेड ‘जमात उल-मुमिनात’ में नई भर्ती बढ़ाने की भी कोशिश है। इस तरह संगठन अब महिलाओं को भी अपने आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बनाने में जुट गया है और उन्हें कट्टर विचारधारा से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
मसूद अज़हर के परिवार की महिलाएं बना रहीं रणनीति
इस ऑनलाइन कोर्स का संचालन खुद मसूद अज़हर की फैमिली की महिलाएं कर रही हैं। उसकी बहनें सादिया अज़हर और समायरा अज़हर हर दिन 40 मिनट का लाइव सेशन लेकर प्रतिभागियों को इस्लाम के नाम पर जिहाद की “महत्ता” समझाने की कोशिश कर रही हैं। बताया गया है कि मसूद अज़हर ने अपनी छोटी बहन सादिया को इस महिला ब्रिगेड की जिम्मेदारी सौंपी है। सादिया का पति यूसुफ अज़हर ऑपरेशन सिंदूर में मारा गया था। इस कोर्स के जरिए जैश-ए-मोहम्मद अपनी कट्टर विचारधारा फैलाने और महिलाओं को संगठन में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। उनका मकसद है कि युवा महिलाओं को प्रभावित कर उन्हें आतंकी गतिविधियों का हिस्सा बनाया जाए। यह एक खतरनाक रणनीति है, जिससे संगठन अपना नेटवर्क और मजबूत करना चाहता है।
ऑनलाइन भर्ती से बढ़ रहा है खतरा
पाकिस्तान में महिलाओं के सामाजिक रूप से सीमित रहने की वजह से जैश-ए-मोहम्मद अब ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करके उनसे जुड़ने की कोशिश कर रहा है। संगठन का मकसद उन महिलाओं तक पहुंचना है जो सीधे संपर्क में नहीं आ पातीं। धीरे-धीरे इस डिजिटल कोर्स के जरिए महिलाओं को अपनी विचारधारा से प्रभावित किया जा रहा है और बाद में उन्हें ‘जमात उल-मुमिनात’ में भर्ती करने की योजना है। सूत्रों का कहना है कि आगे चलकर इस तरह की ट्रेनिंग आत्मघाती या फिदायीन ऑपरेशनों में भी इस्तेमाल की जा सकती है। विशेषज्ञों ने बताया कि यह रणनीति वैसी ही चिंता पैदा करती है जैसी ISIS या हमास जैसी आतंकी संस्थाओं की महिला इकाइयों ने पहले दिखाई थीं। कुल मिलाकर, ऑनलाइन माध्यम के जरिए महिलाओं को भर्ती करना एक नई और खतरनाक चाल है।
महिलाओं के नाम पर आतंकी विस्तार
8 अक्टूबर को मसूद अज़हर ने आधिकारिक रूप से अपनी महिला ब्रिगेड ‘जमात उल-मुमिनात’ की शुरुआत का ऐलान किया। इसके कुछ दिन बाद, 19 अक्टूबर को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के रावलकोट में ‘दुख्तरान-ए-इस्लाम’ नाम का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां महिलाओं को जैश के साथ जोड़ने की कोशिश की गई।
यह पूरी मुहिम इस बात को साफ दिखाती है कि अब जैश-ए-मोहम्मद अपनी कट्टरपंथी सोच में महिलाओं को भी शामिल कर रहा है और उन्हें “जिहादी एजेंडा” का हिस्सा बना रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि जैश की यह डिजिटल रणनीति दक्षिण एशिया के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। क्योंकि अब आतंकवाद सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए कहीं भी फैल सकता है। यह एक नई और बेहद चिंताजनक दिशा है जिसमें आतंकी संगठन आगे बढ़ रहे हैं।
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