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साइना नेहवाल ने 35 साल की उम्र में किया रिटायरमेंट का ऐलान, इस कारण से बैडमिंटन को कहा अलविदा

ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने घुटने की समस्या और आर्थराइटिस के कारण अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन से संन्यास का ऐलान किया। उनका शरीर अब टॉप लेवल खेल की चुनौती नहीं झेल पा रहा।

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Saina Nehwal Retirement: भारतीय खेल जगत की सबसे प्रेरणादायक शख्सियतों में शामिल साइना नेहवाल ने बैडमिंटन को अलविदा कह दिया है। एक पॉडकास्ट में साइना ने खुलकर बताया कि असल में, उन्होंने दो साल पहले ही खेल से दूरी बना ली थी। बस, औपचारिक ऐलान करना जरूरी नहीं समझा। उनका मानना है, जब खिलाड़ी खुद महसूस करता है कि उसके शरीर या मन में अब खेलने की ताकत नहीं बची, तो उसे सच स्वीकार कर लेना चाहिए। साइना ने कहा, उन्होंने अपने फैसले से खेल की शुरुआत की और उसी आत्मसम्मान के साथ करियर को विराम भी दिया। उनके लिए रिटायरमेंट कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, समय के साथ ये फैसला खुद-ब-खुद उनके सामने आ गया।

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हेल्थ को दिया प्रायोरिटी

साइना नेहवाल, जो कभी वर्ल्ड नंबर-1 रही हैं, पिछले काफी वक्त से घुटनों की तकलीफ से जूझ रही थीं। उन्होंने बताया कि उनके घुटनों की कार्टिलेज पूरी तरह घिस चुकी थी और वो आर्थराइटिस की शिकार हो गई थीं। हालत ऐसी थी कि मैच खेलना तो दूर, रोज ट्रेनिंग भी दर्दनाक हो गई थी। घुटनों में हर वक्त सूजन, तेज़ दर्द, यह सब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया था। साइना ने अपने माता-पिता और कोच को भी साफ बता दिया था कि अब उनका शरीर इंटरनेशनल लेवल का दबाव नहीं झेल पा रहा। फैसला लेना भावनात्मक तौर पर बहुत मुश्किल था, लेकिन जिस हकीकत से वह रोज़ रूबरू हो रही थीं, उससे मुंह मोड़ना नामुमकिन था।

टॉप लेवल ट्रेनिंग का दबाव सहना हुआ मुश्किल

इंटरनेशनल लेवल पर टिके रहना आसान नहीं। रोज़ 8-9 घंटे की कड़ी ट्रेनिंग चाहिए। साइना ने बताया, एक वक्त ऐसा आया जब उनके घुटने दो घंटे की ट्रेनिंग भी नहीं झेल पा रहे थे। थोड़ी सी मेहनत के बाद सूजन बढ़ जाती थी, रिकवरी में कई दिन लग जाते थे। बार-बार खुद को धकेलना, यह सब अब दिमाग और शरीर दोनों पर भारी पड़ने लगा था। तब उन्हें समझ आया, अब रुकना ही सही है। शायद, यही सोच उनके रिटायरमेंट का सबसे बड़ा कारण बनी।

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संघर्षों के बीच भी चमकता रहा साइना का करियर

साइना नेहवाल का करियर उपलब्धियों से भरा रहा। 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य जीतकर उन्होंने इतिहास रच डाला। भारत में महिला बैडमिंटन को नई पहचान दी। रियो ओलंपिक 2016 के दौरान लगी बड़ी चोट ने झटका जरूर दिया, मगर साइना ने हार नहीं मानी। 2017 वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य और 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर उन्होंने जोरदार वापसी की। बार-बार लगी चोटों ने जरूर उनकी रफ्तार को धीमा किया, लेकिन उनका जज़्बा कभी नहीं टूटा। उनका आखिरी मुकाबला सिंगापुर ओपन 2023 में हुआ था। भले ही अब साइना कोर्ट पर न दिखें, उनकी कहानी और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा हिम्मत देती रहेगी।

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