नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए महिला अधिकारियों को मिले स्थायी कमीशन के फैसले को बरकरार रखा है और उसमें कोई बदलाव करने से इनकार किया है। अदालत ने यह भी कहा कि जिन महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों को बीच में सेवा से हटाया गया था, उन्हें 20 साल की सेवा पूरी मानते हुए पेंशन का अधिकार दिया जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि उन्हें पिछला वेतन नहीं मिलेगा।
पेंशन के लिए 20 साल की सेवा मानी जाएगी पूरी
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने स्पष्ट किया कि महिला अधिकारियों को पेंशन का लाभ देने के लिए न्यूनतम 20 साल की सेवा पूरी मानी जाएगी, चाहे उन्हें पहले ही सेवा से हटाया गया हो। यह फैसला कई याचिकाओं पर सुनाया गया, जिनमें अधिकारियों ने स्थायी कमीशन न दिए जाने और पूर्व नीतियों को चुनौती दी थी। अदालत ने इस मुद्दे पर राहत देते हुए उनके अधिकारों को मान्यता दी।
महिला अधिकारियों की रिपोर्टिंग पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि महिला अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट्स कई बार सही तरीके से नहीं बनाई गईं। अदालत ने माना कि उन्हें पहले से ही कम अवसर मिलने की सोच के कारण उनकी ग्रेडिंग में लापरवाही बरती जाती थी।
गलत मूल्यांकन से प्रभावित हुई महिला अधिकारियों की मेरिट
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि महिला अधिकारियों की रिपोर्ट इस सोच के साथ तैयार की गई थी कि उन्हें आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलेगा, जिससे उनकी कुल मेरिट पर नकारात्मक असर पड़ा। अदालत ने सेना, वायुसेना और नौसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन पर कार्यरत महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन से वंचित किए जाने के मामलों पर भी अलग से विचार किया।
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