Salary Deduction for Neglecting Parents: हैदराबाद में तेलंगाना सरकार ने एक अहम कानून पास किया है, जिसका मकसद कर्मचारियों को अपने माता-पिता की देखभाल के लिए जिम्मेदार बनाना है। इस बिल के जरिए लापरवाही रोकने और निगरानी व्यवस्था को कानूनी ताकत दी गई है। सरकार का कहना है कि यह कानून बुजुर्गों के सम्मान और सुरक्षा को मजबूत करेगा। ‘तेलंगाना कर्मचारी दायित्व और माता-पिता की देखभाल निगरानी बिल, 2026’ को समाज कल्याण मंत्री अड्लूरी लक्ष्मण कुमार ने विधानसभा में पेश किया था और इसे एक बड़ा सामाजिक सुधार बताया जा रहा है।
बिल के दायरे में सरकारी के साथ निजी और जनप्रतिनिधि भी शामिल
स्पीकर की मंजूरी के साथ पारित यह बिल बुजुर्ग माता-पिता के अधिकारों और देखभाल को कानूनी सुरक्षा देने के उद्देश्य से लाया गया है। इसका मकसद पारिवारिक जिम्मेदारियों को औपचारिक रूप देना है। खास बात यह है कि यह सिर्फ सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी क्षेत्र के कर्मचारी, अधिकारी और विधायक, एमएलसी, पार्षद व सरपंच जैसे जनप्रतिनिधि भी इसके दायरे में शामिल किए गए हैं।
नियम तोड़ने पर कर्मचारी की सैलरी से कटेंगे 10 हजार रुपये
यह कानून कर्मचारियों को अपने माता-पिता की देखभाल और खर्च उठाने की जिम्मेदारी साफ तौर पर तय करता है। इसमें बुजुर्गों के इलाज, रहने और आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेही तय की गई है। अगर कोई लापरवाही करता है तो प्रशासन कार्रवाई कर सकता है। माता-पिता को अपने बच्चों से भरण-पोषण मांगने और शिकायत करने का अधिकार भी दिया गया है। नियम तोड़ने पर कर्मचारी की सैलरी से 15% या 10,000 रुपये तक काटकर माता-पिता को देने का प्रावधान रखा गया है, ताकि उनकी देखभाल सुनिश्चित हो सके।
मंत्री ने बताया बिल का मकसद और लागू करने की योजना
बिल पेश करते हुए मंत्री लक्ष्मण कुमार ने कहा कि माता-पिता की देखभाल करना हर व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है, लेकिन बदलते समय में इसे कानूनी रूप देना जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि यह कदम मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में उठाया गया है। साथ ही, कानून को सही तरीके से लागू करने के लिए एक विशेष निगरानी तंत्र बनाया जाएगा और बुजुर्गों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए व्यवस्थित व्यवस्था भी तैयार की जाएगी।
बुजुर्गों की सुरक्षा और जिम्मेदारी बढ़ाने की पहल
परिवारों में बढ़ती उपेक्षा को देखते हुए इस कानून से समाज में जिम्मेदारी और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। यह सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित न रहकर परिवारों के लिए एक मजबूत नैतिक और कानूनी दिशा तय कर सकता है। मंत्री लक्ष्मण कुमार ने इसे अहम कदम बताते हुए कहा कि सरकार बुजुर्गों की गरिमा और सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि यह कानून राज्य में पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करेगा और वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान के साथ जीवन जीने में मदद करेगा।
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