नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बीच चल रहा टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। दरअसल, ईडी ने अपने अधिकारियों को कथित तौर पर डराने-धमकाने और जांच में बाधा डालने के आरोप में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है।
ईडी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि छापेमारी के दौरान उसके अधिकारियों के साथ बदसलूकी की गई और उनके हाथ से अहम सबूत भी छीन लिए गए। एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से की गई।
ईडी द्वारा दाखिल याचिका में कुल छह व्यक्तियों और संस्थाओं को पक्षकार बनाया गया है। इनमें पश्चिम बंगाल सरकार के साथ-साथ राज्य के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी शामिल हैं। याचिका में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज कुमार वर्मा और दक्षिण कोलकाता के पुलिस उपायुक्त प्रियब्रत रॉय के नाम शामिल हैं। इसके अलावा, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को भी इस मामले में एक पक्ष के रूप में दर्शाया गया है।
मुख्य बातें
- ईडी ने याचिका में ममता बनर्जी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए।
- मामला 2,742 करोड़ रुपये के कथित कोयला घोटाले से जुड़ा है।
- 8 जनवरी को हुई तलाशी के दौरान जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है।
- मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और डीजीपी राजीव कुमार पर जबरन प्रवेश का आरोप है।
- ईडी ने सीबीआई से एफआईआर दर्ज कर जांच कराने की मांग की है।
- याचिका में दावा किया गया है कि टीएमसी समर्थकों ने जांच और अदालती प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की।
- आरोप है कि हाईकोर्ट की सुनवाई से पहले व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए सुनियोजित हंगामा किया गया।
- ईडी का कहना है कि टीएमसी समर्थकों ने हाईकोर्ट की कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास किया।
मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंचने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। संभावना जताई जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर जल्द सुनवाई कर सकता है। फिलहाल, इस पूरे मामले पर ममता बनर्जी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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