20 अक्टूबर 2025 की सुबह व्हाइट हाउस के ईस्ट विंग से भारी मशीनों की आवाज़ सुनाई दी, जिसने लोगों का ध्यान खींचा। आमतौर पर यह हिस्सा प्रेस रूम, स्टाफ ऑफिस और फर्स्ट लेडी के ऑफिस के लिए जाना जाता है, लेकिन उस दिन वहां बुलडोजर और खुदाई की मशीनें काम कर रही थीं। पूरे इलाके को सुरक्षा के लिहाज़ से घेर लिया गया और तोड़फोड़ शुरू हो गई। जब सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें वायरल हुईं, तो लोग हैरान रह गए कि व्हाइट हाउस में ऐसा क्या हो गया कि बुलडोजर चलाना पड़ा। बाद में पता चला कि यह कोई इमरजेंसी मरम्मत नहीं, बल्कि एक प्लान के तहत हो रहा निर्माण कार्य है। यह सब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए प्रोजेक्ट “ग्रैंड बॉलरूम” का हिस्सा है, जिसे वे व्हाइट हाउस में बनवाना चाहते हैं। यह प्रोजेक्ट करीब 2,000 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है।
“अमेरिका का सबसे भव्य बॉलरूम”
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि व्हाइट हाउस में अब तक एक स्थायी बॉलरूम की कमी थी। बड़े कार्यक्रमों या विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए अस्थायी तंबू लगाए जाते थे, जिसे ट्रंप ने अमेरिका की गरिमा के खिलाफ बताया। इसलिए उन्होंने एक भव्य, स्थायी और ऐतिहासिक बॉलरूम बनाने का फैसला लिया। यह नया बॉलरूम करीब 90,000 वर्ग फीट में बनाया जा रहा है। इसमें संगमरमर की फर्श, सोने की परतों वाली छत, क्रिस्टल झूमर और सुनहरी नक्काशी वाले स्तंभ होंगे। इसकी बड़ी खिड़कियां व्हाइट हाउस के दक्षिणी लॉन की ओर खुलेंगी, जिससे शानदार नज़ारा दिखेगा। इस बॉलरूम में 650 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यह बॉलरूम व्हाइट हाउस की ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा बनेगा। उनका मानना है कि हर राष्ट्रपति ने इसका सपना देखा था, और अब वह सपना साकार हो रहा है।
अब तक का सबसे महंगा बदलाव
ट्रंप के इस बॉलरूम प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 250 मिलियन डॉलर (लगभग ₹2,085 करोड़) बताई जा रही है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह पिछले 100 वर्षों में व्हाइट हाउस में हुआ सबसे बड़ा और महंगा बदलाव है। व्हाइट हाउस प्रशासन का कहना है कि इस प्रोजेक्ट में जनता के टैक्स का पैसा नहीं लगेगा। इसका खर्च निजी दानदाताओं और बड़ी कंपनियों से मिलने वाले फंड से किया जाएगा। हालांकि, कुछ लोगों ने इस पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए “प्राइवेट फंडिंग” से पारदर्शिता की कमी हो सकती है। इसके अलावा राष्ट्रपति कार्यालय का कहना है कि यह नया निर्माण ईस्ट विंग को और आधुनिक बनाएगा। इससे भविष्य में बड़े आयोजनों के लिए बाहर से जगह किराए पर लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट व्हाइट हाउस के इस्तेमाल को ज्यादा सुविधाजनक और भव्य बनाने की कोशिश है।
“यह ट्रंप का निजी शोपीस है”
जहां ट्रंप के समर्थक इस बॉलरूम प्रोजेक्ट को “व्हाइट हाउस का गौरवशाली अध्याय” बता रहे हैं, वहीं विपक्षी नेता और इतिहासकार इसे गलत मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह अमेरिका की सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचा सकता है। National Trust for Historic Preservation नाम की एक अमेरिकी संस्था ने इस तोड़फोड़ पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि अमेरिकी लोकतंत्र का प्रतीक है और इसे किसी की निजी पसंद से नहीं बदला जा सकता। पूर्व प्रथम महिला हिलेरी क्लिंटन ने भी ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा कि व्हाइट हाउस किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं है, यह पूरे देश का प्रतीक है, और ट्रंप इसे निजी महल बना रहे हैं। इतिहासकारों का कहना है कि ईस्ट विंग की मौजूदा इमारत 1940 के दशक की है, और बिना पूरी जांच के इसे तोड़ना सही नहीं है।
प्रक्रिया पर उठे सवाल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट National Capital Planning Commission (NCPC) और Historic Preservation Council की औपचारिक मंजूरी के बिना शुरू कर दिया गया। नियमों के अनुसार, व्हाइट हाउस में किसी भी प्रमुख निर्माण कार्य से पहले इन संस्थाओं से हरी झंडी मिलनी जरूरी होती है।
हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से स्पष्टीकरण दिया गया है कि सभी दस्तावेज प्रक्रिया में हैं और समीक्षा के लिए भेजे गए हैं। ट्रंप के प्रवक्ता का कहना है कि “काम नियमानुसार हो रहा है, लेकिन यह एक ‘राष्ट्रपति आपात प्रोजेक्ट’ है, इसलिए समय से पहले शुरू किया गया।”
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