अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में भारत के प्रति जिस तरह का रवैया अपनाए हुए हैं, उससे न केवल भारत बल्कि यूएस में भी चिंता देखी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र में पूर्व अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने एक बार फिर भारत के प्रति ट्रंप की नीतियों पर चिंता जताई है।
न्यूज़वीक में लिखे अपने लेख में हेली ने चीन का मुकाबला करने के लिए भारत को एक मूल्यवान स्वतंत्र और लोकतांत्रिक साझेदार मानने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध पिछले 25 वर्षों की कड़ी मेहनत से विकसित हुए हैं। ऐसे में नई दिल्ली के साथ इन संबंधों को तबाह करना एक बड़ी रणनीतिक आपदा होगी।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी तेल ख़रीद जारी रखने के लिए नई दिल्ली पर 25 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क और 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने के बाद तनाव बढ़ गया है। यह कदम महीनों तक चले तनाव के बाद उठाया गया,जिसमें भारत-पाकिस्तान सीजफायर वार्ता में अमेरिका की भूमिका पर दावे भी शामिल थे। हेली ने ट्रंप के दबाव अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि भारत की ऊर्जा खरीद ‘यूक्रेन के खिलाफ व्लादिमीर पुतिन के क्रूर युद्ध को वित्तपोषित (financed) करने में मदद कर रही है। हालांकि, उन्होंने भारत के साथ दुश्मन जैसा व्यवहार करने के खिलाफ चेताया है। उन्होंने कहा, ‘एशिया में चीनी प्रभुत्व के खिलाफ एकमात्र देश के साथ 25 वर्षों की प्रगति को नष्ट करना एक रणनीतिक आपदा होगी।
निक्की हेली ने कहा कि लंबे वक्त से भारत का उदय चीन के आर्थिक उभार के बाद से सबसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक विकास हो सकता है। उन्होंने कहा,सरल शब्दों में, जैसे-जैसे भारत की शक्ति बढ़ेगी, वैसे-वैसे चीन की महत्वाकांक्षाओं कम हो जाएंगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई नहीं की गई तो बीजिंग इस दरार का फायदा उठाएगा। एक व्यापारिक विवाद को स्थायी टूट में बदलना एक बहुत बड़ी और टाली जा सकने वाली गलती होगी।
इसके अलावा हेली ने 1982 में व्हाइट हाउस में रोनाल्ड रीगन के इंदिरा गांधी को कहे गए शब्दों को दोहराते हुए निष्कर्ष निकाला, भले ही वाशिंगटन और नई दिल्ली कभी-कभी अलग-अलग रास्तों पर चलें, लेकिन उनकी मंजिल एक ही होनी चाहिए।
निक्की हेली ने कहा कि चीन का मुकाबला करने के लिए अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी एक सहज निर्णय होना चाहिए। निक्की हेली ने बताया कि भारत में चीन के समान पैमाने पर ऐसे उत्पादों का निर्माण करने की क्षमता है जो अमेरिका को अपनी महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को बीजिंग से दूर ले जाने में मदद कर सकते हैं।
इससे पहले हेली ने ट्रंप प्रशासन की उस नीति की आलोचना की थी,जिसमें उन्होंने भारत पर रूसी तेल खरीद के लिए टैरिफ लगाया था, जबकि चीन जो कि रूस और ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है को 90 दिनों की छूट दी गई थी।
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