पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से कपिल सिब्बल और अन्य वरिष्ठ वकील दलीलें दे रहे थे, लेकिन ममता ने खुद कोर्ट से कुछ बातें रखने की अनुमति मांगी। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत के साथ हुए सवाल-जवाब के बीच यह दुर्लभ दृश्य था, जहां मुख्यमंत्री खुद अपनी ओर से दलीलें पेश कर रही थीं, जो आमतौर पर नहीं होता।
सुप्रीम कोर्ट से ममता बनर्जी ने की भावुक अपील
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की शुरुआत में ममता बनर्जी ने बेहद भावुक और शांति से कहा, “आप सभी सम्मानित जस्टिस से मेरी विनती है, मेरी बात सुनी जाए। जब न्याय दरवाजे के पीछे रो रहा हो, तो मैंने कई बार निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा है।” कोर्टरूम में ममता के पीछे सांसद कल्याण बनर्जी खड़े थे, और वह बीच-बीच में बांग्ला में उनसे बातचीत करती दिखीं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने रोका
जैसे ही ममता बनर्जी अपनी बात विस्तार से रखने लगीं, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, “पश्चिम बंगाल राज्य ने याचिका दायर की है और आपकी तरफ से कुछ प्रमुख वरिष्ठ अधिवक्ता यहां मौजूद हैं, जिनमें कपिल सिब्बल और श्याम दिवान आपकी दलीलें रख रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि “हर समस्या का कोई न कोई समाधान होता है, ताकि कोई निर्दोष नागरिक प्रभावित न हो।”
SIR प्रक्रिया पर ममता बनर्जी के सबूत
ममता बनर्जी ने फिर से आग्रह करते हुए कहा, “माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय, मैं कुछ तस्वीरें कोर्ट के सामने रखना चाहती हूं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि ये तस्वीरें उनकी व्यक्तिगत नहीं हैं, बल्कि प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई हैं। ममता ने बताया कि इन तस्वीरों से यह साबित होता है कि पूरी SIR प्रक्रिया का उद्देश्य केवल नाम हटाना था, ना कि नाम जोड़ना।
ममता बनर्जी ने लगाया आरोप
ममता बनर्जी का लहजा इसके बाद और सख्त हो गया। उन्होंने सीधे आरोप लगाते हुए कहा, “पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। चुनावों के नजदीक आते ही SIR के नाम पर वहां के लोगों को टारगेट किया गया।” ममता ने यह भी दावा किया कि इस प्रक्रिया से जुड़े मामलों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और कई BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव अधिकारियों पर उत्पीड़न का दोष डाला जा रहा है।
ममता बनर्जी ने कोर्ट के सामने उदाहरण देते हुए कहा, “मान लीजिए, शादी के बाद एक बेटी ससुराल जाती है, तो यह सवाल उठाया जाता है कि वह पति की उपाधि क्यों इस्तेमाल कर रही है?” उन्होंने बताया कि शादी के बाद ससुराल गई महिलाओं के नाम एकतरफा हटा दिए गए। ममता ने यह भी कहा कि गरीब लोगों ने यदि फ्लैट खरीदा या घर बदला, तो उनका नाम भी काट दिया गया। इसके साथ ही, आधार के साथ अतिरिक्त प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं और दूसरे राज्यों के निवास प्रमाण पत्र या जाति प्रमाण पत्र को मान्यता नहीं दी जा रही।
ममता बनर्जी का सबसे तीखा सवाल
ममता बनर्जी ने अपने तीखे सवाल में पूछा, “अगर SIR प्रक्रिया इतनी जरूरी थी, तो असम और अन्य उत्तरी राज्यों में क्यों नहीं कराई जा रही? केवल पश्चिम बंगाल को ही क्यों निशाना बनाया गया?” उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि यह काम दो महीने में करने की कोशिश की गई, जबकि सामान्य तौर पर इसे दो साल लगते हैं। ममता ने यह भी कहा कि यह सब चुनाव की पूर्व संध्या पर किया गया, जिससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि इसे राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने ममता बनर्जी की भावनात्मक दलीलों को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट किया कि मामला राज्य बनाम निर्वाचन आयोग का है। कोर्ट ने यह भी कहा कि दलीलें वरिष्ठ वकीलों के माध्यम से रिकॉर्ड पर लाई जाएंगी। अदालत ने जोर दिया कि हर नागरिक के वोटिंग अधिकार की रक्षा सर्वोपरि है और इसे सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
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