ढाका: बांग्लादेश में 12 फरवरी 2024 को हुए 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने ऐतिहासिक जीत हासिल की। 300 सीटों वाले संसद में बीएनपी ने 200 से अधिक सीटें जीतीं, जिससे पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना पक्का हो गया है। यह बांग्लादेश के इतिहास में 36 साल बाद पहला मौका है जब देश को पुरुष प्रधानमंत्री मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की ऐतिहासिक जीत के लिए पार्टी के अध्यक्ष तारिक रहमान को हार्दिक बधाई दी है।
पीएम मोदी ने किया पोस्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश चुनाव पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की शानदार जीत के लिए पार्टी के अध्यक्ष तारिक रहमान को बधाई दी। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “मैं श्री तारिक रहमान को बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में बीएनपी की महत्वपूर्ण जीत के लिए दिल से बधाई देता हूं। यह विजय बांग्लादेश की जनता के आपके नेतृत्व पर भरोसे को दिखाती है।” इसके बाद उन्होंने कहा, “भारत हमेशा एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के साथ खड़ा रहेगा। मुझे उम्मीद है कि हम मिलकर हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेंगे और साझा विकास की दिशा में काम करेंगे।”
I convey my warm congratulations to Mr. Tarique Rahman on leading BNP to a decisive victory in the Parliamentary elections in Bangladesh.
— Narendra Modi (@narendramodi) February 13, 2026
This victory shows the trust of the people of Bangladesh in your leadership.
India will continue to stand in support of a democratic,…
बीएनपी ने 200 से अधिक सीटों के साथ जीत की हासिल
बीएनपी लगातार बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है, हालांकि मतगणना अभी भी जारी है। अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी आवामी लीग पार्टी का शासन आंदोलन के बाद ढह गया था, जिसके बाद बांग्लादेश में पहला आम चुनाव हुआ। इस चुनाव में आवामी लीग को भाग लेने का अवसर नहीं मिला। यूनुस सरकार ने आवामी लीग को अवैध घोषित कर चुनावों से बाहर कर दिया था। इसके बाद बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच मुख्य मुकाबला हुआ, जिसमें बीएनपी ने 200 से अधिक सीटों पर जीत की ओर कदम बढ़ाया है। बांग्लादेश चुनाव आयोग के एक प्रवक्ता ने कहा कि कुछ सीटों के नतीजे अभी बाकी हैं, जो कुछ घंटों में घोषित हो सकते हैं।
जमात-ए-इस्लामी को बांग्लादेश चुनाव में मिली भारी हार
बांग्लादेश की कट्टर इस्लामवादी पार्टी जमात-ए-इस्लामी और इसके सहयोगियों का इस चुनाव में हाल बेहाल रहा है। पाकिस्तान की आईएसआई और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी समूहों से अपने संबंधों के लिए कुख्यात यह गठबंधन केवल 50 सीटों तक सिमटता हुआ दिख रहा है। फाइनल नतीजे आने बाकी हैं, लेकिन इस चुनाव में छोटी पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों को भी सीमित सफलता मिली। बीएनपी की ऐतिहासिक जीत का मुख्य श्रेय पार्टी के अध्यक्ष तारिक रहमान को जाता है, जो इस सफलता के सबसे बड़े प्रतीक बनकर उभरे हैं।
36 साल बाद तारिक रहमान बनेंगे पुरुष प्रधानमंत्री
बीएनपी की ऐतिहासिक जीत के बाद तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना अब पक्का हो गया है। वह 36 साल बाद बांग्लादेश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री होंगे, क्योंकि पिछले कई दशकों से बांग्लादेश की महिलाएं ही इस पद पर काबिज रही हैं, जैसे कि खालिदा जिया और शेख हसीना। तारिक रहमान और उनकी पार्टी की जीत को ‘क्लीन पॉलिटिक्स’ और भ्रष्टाचार से मुक्त शासन की उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और लोकतंत्र की बहाली का वादा किया था, साथ ही कानून-व्यवस्था में सुधार लाने की योजना भी जाहिर की थी, ताकि देश का हर नागरिक सुरक्षित महसूस कर सके।
बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता और सुधारों की उम्मीद
तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगरा-6 सीटों पर चुनाव लड़ा और दोनों जगह भारी मतों से जीत हासिल की। यह बांग्लादेश में जेन-Z के आंदोलन के बाद हुआ पहला बड़ा चुनाव था, जिसमें 60% से अधिक मतदान हुआ। बीएनपी की इस जीत को राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक सुधारों की उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि इस्लामी दलों की भूमिका और संवैधानिक बदलावों पर निगाहें बनी रहेंगी। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की हालिया मृत्यु के बाद पार्टी की बागडोर उनके बेटे तारिक रहमान के हाथों में आ गई, जिन्होंने 17 साल के निर्वासन के बाद 2025 में बांग्लादेश लौटने का फैसला लिया था।
36 साल तक बांग्लादेश की राजनीति में महिलाओं का रहा दबदबा
बांग्लादेश की राजनीति में खालिदा जिया और शेख हसीना का प्रभाव दशकों तक रहा। दोनों नेताओं ने 1991 के बाद से अधिकांश समय प्रधानमंत्री पद पर कब्जा जमाए रखा, जिसे “बैटलिंग बेगम्स” की प्रतिस्पर्धा कहा जाता है। खालिदा जिया का पहला कार्यकाल 20 मार्च 1991 से 30 मार्च 1996 तक था, जब वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। इसके बाद उनका दूसरा कार्यकाल बहुत छोटा रहा, क्योंकि एक विवादास्पद चुनाव के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। शेख हसीना ने 1996 से 2000 तक पहली बार प्रधानमंत्री का पद संभाला, फिर खालिदा जिया ने 10 अक्टूबर 2001 से 29 अक्टूबर 2006 तक तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया।
शेख हसीना की लंबी प्रधानमंत्रीशाही
1996 में हुए आम चुनाव में शेख हसीना की अवामी लीग ने बहुमत हासिल कर 23 जून को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनका पहला कार्यकाल 15 जुलाई 2001 तक रहा, जिसमें उन्होंने आर्थिक विकास, गरीबी उन्मूलन और भारत के साथ गंगा जल समझौता जैसे क्षेत्रीय मुद्दों पर काम किया। हालांकि, राजनीतिक अस्थिरता, विरोध प्रदर्शन और हड़तालों के कारण शासन में मुश्किलें बनी रहीं। 2001 में खालिदा जिया की सत्ता में वापसी हुई, लेकिन 6 जनवरी 2009 से 5 अगस्त 2024 तक शेख हसीना ने लगातार चार कार्यकालों तक प्रधानमंत्री पद संभाला। छात्रों के आंदोलन के कारण उन्हें चौथे कार्यकाल में सत्ता से बेदखल कर दिया गया। इस प्रकार, 1991 से 2024 तक बांग्लादेश की राजनीति में महिलाओं का वर्चस्व रहा। इसके बाद 18 महीने तक यूनुस की कार्यवाहक सरकार ने सत्ता संभाली। अब 36 साल बाद बांग्लादेश को पहला पुरुष प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार की उम्मीद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में सुधार की संभावनाएं जताई जा रही हैं। इससे पहले, मोदी ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बीमारी को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की थी और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की थी। बाद में, खालिदा जिया के निधन पर उन्होंने गहरा शोक व्यक्त किया, जिसे दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों में सुधार के संकेत के रूप में देखा गया। अब मोदी ने बीएनपी की ऐतिहासिक जीत और तारिक रहमान के नेतृत्व को लेकर उन्हें बधाई दी है, जो रिश्तों में एक नई दिशा की उम्मीद जगा रहे हैं।
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