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पश्चिम बंगाल में SIR पर सियासी संग्राम, TMC नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा SIR के डर से 7 दिन में 7 लोगों ने दी जान, BJP बोली, जनता को गुमराह कर रही तृणमूल

TMC नेता अभिषेक बनर्जी ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि SIR के डर से 7 दिन में 7 लोगों ने अपनी जान दे दी है। BJP बोली, जनता को गुमराह कर रही तृणमूल

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पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सियासी पारा तेजी से बढ़ रहा है। TMC के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया है कि इन संशोधनों और प्रचार-प्रसार के कारण कम-से-कम 7 लोगों ने पिछले 7 दिनों में अपनी जान दी है। उन्होंने राज्य में डर का माहौल बनने का आरोप लगाया है, जिसमें लोग SIR के डर से मानसिक तनाव में आ गए हैं।

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इससे पहले शनिवार रात तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने दावा किया कि पूर्व बर्दवान जिले के जमालपुर के नबाग्राम गांव में रहने वाले बिमल संत्रा की मौत SIR से जुड़े डर और तनाव की वजह से हुई।

अभिषेक बनर्जी का बड़ा आरोप

अभिषेक बनर्जी ने कहा है कि क्या ये छह-सात लोग वैध मतदाता थे या अवैध? इस सवाल के साथ उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को जिम्मेदार ठहराया। उनका यह भी कहना है कि भाजपा और चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया को ऐसे संचालित किया है कि कमजोर और दस्तावेज-विहीन लोगों को डर के ज़ाल में लाया गया है। दूसरी ओर BJP ने TMC के इस दावे को राजनीति करार दिया है और जांच की मांग की है।

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TMC ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा बीजेपी की डर और नफरत की राजनीति ने एक और कीमती जान ले ली है। पनिहाटी के प्रदीप कर, दिनहाटा के बुजुर्ग और अब बिमल संत्रा ये सब SIR के आतंक का नतीजा हैं। बिमल संत्रा तमिलनाडु में प्रवासी मजदूर के तौर पर काम करते थे। उनके बेटे ने बताया कि पिता लंबे समय से तनाव में थे और SIR से जुड़ी अनिश्चितता को लेकर परेशान रहते थे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

TMC ने BJP और चुनाव आयोग पर साधा निशाना

राज्य मंत्री अरूप विश्वास और सांसद पार्थ भौमिक ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग SIR प्रक्रिया के नाम पर बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने की साजिश कर रहा है। उनका कहना है कि यह भय और नफरत की राजनीति का हिस्सा है। टीएमसी नेताओं ने चुनाव आयोग (EC) पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया के जरिए जनता में डर फैलाया जा रहा है।

BJP का पलटवार-TMC जनता को गुमराह कर रही

वहीं, बीजेपी नेता शिशिर बजोरिया ने TMC के आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि SIR केवल वोटर लिस्ट अपडेट करने की एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीति का हथियार बना रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में करीब 40% BLO अस्थायी हैं और राज्य सरकार से जुड़े होने के कारण निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

क्या है SIR (Special Intensive Revision)?

SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है, जिसमें वोटर लिस्ट को अपडेट किया जाता है। इस दौरान 18 साल से ऊपर के नए मतदाताओं को जोड़ा जाता है। मृतक या स्थानांतरित लोगों के नाम हटाए जाते हैं। पता या नाम में हुई त्रुटियों को सुधारा जाता है। BLO घर-घर जाकर फॉर्म भरवाते हैं और मतदाताओं का डेटा अपडेट करते हैं।

देशभर में 12 राज्यों में चल रहा है SIR

चुनाव आयोग के अनुसार, 27 अक्टूबर से 7 फरवरी 2026 तक SIR की प्रक्रिया 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जारी रहेगी। अंडमान-निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल। 103 दिन तक चलने वाली यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अद्यतन करने और 2025-26 चुनावी तैयारियों के लिए अहम मानी जा रही है।

पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर मचा राजनीतिक घमासान अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि भय बनाम विश्वास की सियासत का प्रतीक बन गया है। जहां TMC इसे बीजेपी की नफरत की राजनीति बता रही है, वहीं बीजेपी इसे झूठा प्रचार करार दे रही है।

Keywords: Abhishek Banerjee On SIR, Voter List Revision West Bengal, Special Intensive Revision 2025, SIR Update News In Hindi

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