भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में लगभग सात सौ सीएए सहायता कैंप लगाने की बड़ी योजना बनाई है। पार्टी ने यह बड़ा फैसला एक मीटिंग में लिया है, जहाँ शरणार्थियों को नागरिकता देने के काम को जल्दी करने पर बात हुई। बीजेपी, खास करके भारत-बांग्लादेश सीमा के पास के जिलों में, ये कैंप लगाकर नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी सीएए के मुद्दे पर अपनी तैयारियों को मजबूत कर रही है।
चुनाव से पहले 700 कैंप की तैयारी क्यों
बीजेपी पहले भी भारत-बांग्लादेश सीमा के पास इस तरह के कैंप लगाती रही है, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव पास आने के कारण पार्टी अब इस काम में और तेज़ी ला रही है। बीजेपी का मुख्य मकसद यह है कि शरणार्थियों को नागरिकता देने का काम जल्दी शुरू हो और उसमें तेज़ी आए। पार्टी के सूत्रों के हिसाब से, अगले कुछ हफ्तों में बंगाल में लगभग सात सौ सीएए शिविर लगाने का फैसला लिया गया है। इन कैंपों में आम लोगों को सीएए के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी, और यह भी बताया जाएगा कि इस कानून के तहत नागरिकता पाने के लिए कौन लोग आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन में मदद के लिए स्वयंसेवकों की भर्ती
बीजेपी ने योजना बनाई है कि वह इन शिविरों के लिए स्वयंसेवकों को काम पर रखेगी। पार्टी की टीम कैंप लगाने की जगहें तय करेगी, स्थानीय सरकार के लोगों के साथ मिलकर काम करेगी, और तकनीकी मदद भी देगी। नेताओं ने इस बात पर भी चर्चा की कि नागरिकता का कागज पाने में लोगों को किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इन मुश्किलों में ज़रूरी कागज़ात की कमी होना, फॉर्म भरने में कठिनाई आना और आवेदन की प्रक्रिया को लेकर उलझन होना शामिल हैं। पार्टी की योजना है कि वह स्वयंसेवकों की सहायता से इन सभी मुश्किलों को दूर करेगी। कैंप लगाने का यह फैसला चुनाव से पहले सीएए के मुद्दे को लेकर पार्टी की मज़बूत तैयारी का एक बड़ा हिस्सा है।
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