महाराष्ट्र में नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव खत्म हुए, और इनके नतीजों ने सियासत में नई हलचल मचा दी। मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए शिवसेना (शिंदे गुट) के उपनेता और प्रवक्ता संजय निरुपम ने साफ कहा कि शिवसेना की असली ताकत जनता के भरोसे में है, न कि किसी गठबंधन या सहयोगी दल के दम पर। उन्होंने लंबे वक्त से चले आ रहे उस आरोप को भी खारिज किया कि शिवसेना की मजबूती सिर्फ बीजेपी के साथ रहने से है। चुनावी आंकड़े खुद इसका जवाब हैं। निरुपम का दावा है कि जहां उबाठा गुट बस सीमित दायरे में रह गया, वहीं शिंदे की अगुवाई में शिवसेना आज राज्य की दूसरी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई है।
मराठी अस्मिता और नेतृत्व की गूंज
निरुपम ने जीत का सीधा श्रेय एकनाथ शिंदे के नेतृत्व और मराठी मानूस के भरोसे को दिया। उनके मुताबिक, ये सिर्फ आंकड़ों की जीत नहीं है, ये मराठी लोगों के भरोसे की जीत है। भले ही महायुति के साथी दलों ने स्थानीय चुनाव अलग-अलग लड़े, लेकिन जनता ने शिंदे पर भरोसा दिखाकर साफ कर दिया कि शिवसेना की पहचान आज भी कायम है। बाला साहेब ठाकरे की सोच के साथ जुड़े लोग भी उसी नेतृत्व के साथ खड़े हैं, जो असली मूल्यों को आगे बढ़ा रहा है। निरुपम ने कहा, यही भरोसा बीएमसी चुनाव में भी दिखेगा।
‘ट्रिपल इंजन सरकार’ की तैयारी
बीएमसी चुनाव की बात आई तो संजय निरुपम ने उबाठा गुट और कांग्रेस पर सीधा निशाना साधा। उनका कहना था, जब-जब ये दोनों साथ आए हैं, मुंबई और महाराष्ट्र ने अस्थिरता देखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे गठबंधन के वक्त कानून-व्यवस्था बिगड़ी और आम लोगों में डर बढ़ा। अब मुंबईकर डर और अराजकता नहीं चाहता। वो चाहता है विकास, स्थिरता, और मजबूत प्रशासन। इसी वजह से निरुपम ने ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ का आइडिया रखा मतलब, केंद्र, राज्य और महानगरपालिका तीनों जगह एक ही गठबंधन की सरकार हो, ताकि विकास के काम तेजी से आगे बढ़ें और तालमेल बना रहे।
महापौर पद पर साफ रुख
बीएमसी चुनाव में सीट बंटवारे पर भी निरुपम ने बिल्कुल साफ बात की। उन्होंने कहा, जैसे विधानसभा चुनाव में सीटें तय करने का फार्मूला बना था, वही फार्मूला महानगरपालिका चुनाव में भी चले। जहां-जहां शिवसेना के नगरसेवक हैं या जो शिंदे गुट के साथ आए हैं, वहां शिवसेना को प्राथमिकता मिले। उबाठा गुट पर उन्होंने तंज कसा कि वो वोट बैंक के चक्कर में असली विचारधारा से भटक गया है। निरुपम ने साफ कहा कि मुंबई का महापौर वही बनेगा जो शहर की पहचान, विकास और सुरक्षा को सबसे ऊपर रखेगा। आखिर में, जनता ही फैसला करेगी।
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