मुंबई: शिवसेना के उपनेता और प्रवक्ता संजय निरुपम ने मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में महानगरपालिका चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में उबाठा गुट का राजनीतिक अस्तित्व लगभग खत्म हो गया है। जनता ने साफ कर दिया है कि असली शिवसेना कौन-सी है। निरुपम ने कहा कि उबाठा गुट एक भी महापौर नहीं बना सका, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के तीन महापौर बनने की पूरी संभावना है। उन्होंने इसे उबाठा गुट के लिए बेहद शर्मनाक परिणाम बताया।
उन्होंने बताया कि आज महाराष्ट्र में शिवसेना दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है, जबकि उबाठा पांचवें स्थान पर खिसक गया है। अब तक हुए स्थानीय चुनावों में शिवसेना के 399 नगरसेवक चुने गए हैं, जबकि उबाठा के सिर्फ 155 नगरसेवक ही जीत पाए हैं। मुंबई महानगरपालिका चुनाव में भी जनता ने उबाठा को विपक्ष में बैठने का फैसला सुनाया है।
धर्म के आधार पर वोटिंग पर चिंता
संजय निरुपम ने कहा कि इस चुनाव में पहली बार खुलकर धर्म के आधार पर मतदान देखने को मिला। कई इलाकों में हिंदू और मुस्लिम वोट साफ-साफ बंटे नजर आए। उन्होंने बताया कि जिन इलाकों में मुस्लिम वोट ज्यादा थे, वहां शिवसेना के उम्मीदवार जीतते-जीतते हार गए। उन्होंने वार्ड नंबर 32, 121, 79, 61, 201 और 204 सहित करीब 15 वार्डों का जिक्र किया।
निरुपम ने आरोप लगाया कि मुस्लिम वोट एक रणनीति के तहत अलग-अलग पार्टियों में बांटे गए—जहां कांग्रेस मजबूत थी वहां कांग्रेस को, जहां उबाठा मजबूत थी वहां उबाठा को और जहां एमआईएम मजबूत थी वहां एमआईएम को वोट दिया गया। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी बताया।
एमआईएम पर निशाना
निरुपम ने कहा कि महाराष्ट्र में एमआईएम का बढ़ता प्रभाव राज्य की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। मुम्ब्रा में एमआईएम उम्मीदवार की जीत के बाद दिए गए बयानों को उन्होंने समाज में तनाव फैलाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि खिलजी, तुगलक और मुगलों जैसी ताकतें भी देश को तोड़ नहीं सकीं, तो मुम्ब्रा की गलियों से उठी कुछ आवाजें क्या कर लेंगी।
उन्होंने नागपुर दंगे के आरोपी फहीम की पत्नी के एमआईएम से जीतने और मालेगांव जैसे इलाकों में विवादित तत्वों को संरक्षण मिलने पर भी चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि ऐसे इलाकों में चुने गए प्रतिनिधियों और उन्हें वोट देने वालों पर कड़ी नजर रखी जाए।
कांग्रेस और उबाठा पर हमला
निरुपम ने कहा कि कांग्रेस, जो कभी सभी वर्गों की पार्टी मानी जाती थी, अब सिर्फ मुस्लिम वोट बैंक की पार्टी बनती जा रही है। उन्होंने बताया कि परभणी में उबाठा के जो उम्मीदवार जीते हैं, उनमें से दो-तिहाई मुस्लिम समाज से हैं, जो बालासाहेब ठाकरे के विचारों के बिल्कुल खिलाफ है।
हिंदू मतदाताओं से अपील
संजय निरुपम ने कहा कि ठाकरे भाइयों ने हिंदू वोट को बांटा, जिसका फायदा मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति ने उठाया। उन्होंने हिंदू मतदाताओं से सतर्क रहने की अपील की। मालेगांव, परभणी, मुम्ब्रा, संभाजीनगर, भिवंडी और मानखुर्द जैसे इलाकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है, क्योंकि ये इलाके दंगाइयों और ब्लास्ट के आरोपियों को संरक्षण देने वाले बनते जा रहे हैं।
बिहार भवन पर बयान
बिहार भवन के निर्माण के फैसले का स्वागत करते हुए निरुपम ने कहा कि इससे इलाज के लिए आने वाले बिहार के लोगों को सुविधा मिलेगी। उन्होंने बिहार भवन का विरोध करने वालों की सोच पर सवाल उठाए और कहा कि जनता ने ऐसे विरोध को नकार दिया है।
उन्होंने ठाकरे भाइयों को याद दिलाया कि प्रबोधनकार ठाकरे ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि उनका मूल क्षेत्र मगध था, जो आज के बिहार में आता है। उन्होंने कहा कि जिनकी जड़ें बिहार से जुड़ी हैं, वही अगर बिहार का विरोध करें, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
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