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क्या राज और उद्धव ठाकरे में फिर से पड़ गयी फूट? कल्याण-डोंबिवली में मनसे करेगी शिंदे सेना का समर्थन

BMC चुनाव में जंहा ठाकरे ब्रदर्स एक साथ मंच पर नजर आये थे अब वही क्या दोनों के बीच की दूरियां बढ़ने लगी है। खबरों के अनुसार, राज ठाकरे की पार्टी मनसे ने कल्याण-डोंबिवली में शिंदे सेना का समर्थन करेगी।

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कल्याण-डोंबिवली: महाराष्ट्र की राजनीति में नगर निकाय चुनावों के नतीजों के बाद नए समीकरण उभरने लगे हैं। कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) इसका ताजा उदाहरण बनकर सामने आई है। चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने साथ आकर कई महानगरपालिकाओं में मिलकर लड़ने की कोशिश की थी। उनका इरादा साफ था, मराठी वोट बैंक को एकजुट करना और शिवसेना के बंटवारे के बाद बने नए समीकरणों को चुनौती देना। लेकिन जैसे ही नतीजे आए, ये गठबंधन कमजोर पड़ता दिखा। असल में, KDMC में MNS ने शिंदे गुट को समर्थन देकर साफ कर दिया कि चुनावी गठबंधन और असली सत्ता की राजनीति में जमीन-आसमान का फर्क है।

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बहुमत पहले से ही मजबूत

अगर आंकड़ों की बात करें, तो KDMC में कुल 31 वार्ड और 122 पार्षद हैं। बहुमत के लिए 62 सीटें चाहिए, लेकिन नतीजों ने तस्वीर साफ कर दी थी। शिंदे गुट की शिवसेना ने 53 सीटें जीत लीं, बीजेपी को 50 सीटें मिलीं। दोनों मिलकर 103 पार्षदों के साथ आराम से मजबूत स्थिति में हैं। दूसरी तरफ, उद्धव ठाकरे की शिवसेना को सिर्फ 11 सीटें ही मिल पाईं। MNS को 5, कांग्रेस को 2 और एनसीपी (शरद पवार गुट) को 1 सीट पर ही संतोष करना पड़ा। यानी सत्ता बनाने के लिए MNS का समर्थन जरूरी तो नहीं था, लेकिन इसका राजनीतिक मतलब काफी बड़ा है।

ठाकरे बंधुओं का गठबंधन क्यों नहीं चला?

अब सवाल है, ठाकरे बंधुओं का गठबंधन क्यों नहीं चल पाया? जानकारों के मुताबिक, दोनों भाइयों की जोड़ी से भावनात्मक लहर जरूर बनी, पर संगठन की ताकत और जमीनी पकड़ कमजोर रही। BMC समेत कई नगर निकायों में ये गठबंधन अपेक्षा के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सका। खासकर मुंबई जैसे शहरों में वोटरों ने स्थानीय मुद्दों, विकास और मजबूत प्रशासन को ज्यादा तवज्जो दी। KDMC में भी यही झलक दिखी। चुनाव के बाद राज ठाकरे की पार्टी ने साफ देखा कि विपक्ष में बैठने से बेहतर है सत्ता के करीब रहना, ताकि राजनीतिक अहमियत बनी रहे। इसी वजह से MNS ने उद्धव गुट की बजाय शिंदे गुट का साथ देना ज्यादा फायदेमंद समझा।

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आगे क्या होंगे इसके सियासी मायने?

MNS के फैसले ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए संकेत दिए हैं। एक तरफ ये कदम उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा झटका है, वहीं शिंदे गुट और बीजेपी की पकड़ और मजबूत होती नजर आ रही है। आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए भी ये गठबंधन राजनीति की दिशा तय कर सकता है। KDMC में भले ही सत्ता का समीकरण पहले से साफ था, लेकिन MNS की चाल ने बता दिया कि राज ठाकरे मौके और जरूरत के हिसाब से रणनीति बदलने से नहीं हिचकेंगे। कुल मिलाकर, इस चुनाव के बाद महाराष्ट्र में गठबंधनों की स्थिरता पर फिर से सवाल उठने लगे हैं।

Keywords: KDMC Election, Shiv Sena Shinde Faction, MNS Support Shinde Shiv Sena

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