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सात हजार साल पुरानी धरोहर…धर्म और मर्यादा का प्रतिक, आज अयोध्याधाम पहुंचेगी प्रभु श्रीराम का ‘कोदंड’

सात हजार साल पुरानी धरोहर, धर्म और मर्यादा का प्रतीक प्रभु श्रीराम का 'कोदंड' आज अयोध्याधाम पहुंचेगा और रामलला को अर्पित होगा।

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अयोध्या: भगवान श्रीराम के लिए विशेष रूप से निर्मित पंचधातु का भव्य कोदंड इन दिनों पूरे देश की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। 286 किलो वजनी ये कोदंड 3 जनवरी 2026 को ओडिशा के राउरकेला से अपनी पवित्र यात्रा पर निकल पड़ा। राउरकेला के सनातन जागरण मंच ने इसे धूमधाम से विदा किया, शहर में भव्य शोभायात्रा निकली, लोग उमड़ पड़े, हर तरफ भक्ति और उत्साह नजर आया। यात्रा ओडिशा के सभी 30 जिलों से गुजरी। जहां भी कोदंड पहुंचा, श्रद्धालुओं ने फूल बरसाए, भजन गाए, और उसका स्वागत किया। 19 जनवरी को कोदंड पुरी पहुंचा। वहां भगवान जगन्नाथ के दर्शन कराए गए, फिर इसे आध्यात्मिक रूप से समर्पित किया गया। तय कार्यक्रम के मुताबिक, 22 जनवरी को कोदंड अयोध्या के श्रीराम मंदिर पहुंचेगा और वहां श्रीराम को अर्पित होगा।

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कोदंड की खासियत क्या है?

इस कोदंड की खासियत सिर्फ इसका वजन या आकार नहीं है, बल्कि ये भी कि इसे कैसे और किन लोगों ने बनाया। पंचधातु (सोना, चांदी, एल्युमिनियम, जस्ता और लोहा) से बना ये कोदंड तमिलनाडु के कांचीपुरम में तैयार हुआ। 48 महिला कारीगरों ने करीब आठ महीने तक जुटकर इसे गढ़ा। उनकी मेहनत और शिल्पकला ने कोदंड को सिर्फ धातु का टुकड़ा नहीं रहने दिया, उसमें साधना और समर्पण की आत्मा भर दी। कोदंड पर की गई बारीक नक्काशी इसे और खास बनाती है। इसमें कारगिल युद्ध समेत भारतीय सेना के शौर्य और बलिदान की कहानियां उकेरी गई हैं। ये पहल कोदंड को सिर्फ आध्यात्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति का भी प्रतीक बना देती है।

धर्म और मर्यादा का प्रतीक है कोदंड

कोदंड, भगवान श्रीराम के धनुष का नाम है। इसका जिक्र वाल्मीकि रामायण, तुलसीदास की रामचरितमानस और कई पुराणों में मिलता है। श्रीराम को ‘कोदंडधारी’ कहा गया, क्योंकि उनके हाथ में हमेशा यही धनुष रहा। कोदंड सिर्फ युद्ध का औजार नहीं, धर्म, मर्यादा और न्याय की स्थापना का भी प्रतीक है।तुलसीदास ने अपने छंदों में कोदंड के जरिए श्रीराम की तेजस्विता, संयम और वीरता को खूब उकेरा है। उनके मुताबिक, कोदंड श्रीराम के व्यक्तित्व का हिस्सा है, जहां शक्ति है, वहीं संयम भी है। शायद यही वजह है कि कोदंड को हमेशा अधर्म के विनाश और धर्म की रक्षा का संकेतक माना गया है।

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क्या है कोदंड की धार्मिक मान्यताएं?

कहते हैं, भगवान श्रीराम ने कोदंड का इस्तेमाल कभी घमंड या आक्रामकता के लिए नहीं किया। उन्होंने समुद्र को साधने के लिए कोदंड उठाया, रावण का अंत भी इसी से किया, लेकिन मकसद हमेशा धर्म की रक्षा रहा। तमिलनाडु के धनुषकोडी के पास बना कोदंड रामस्वामी मंदिर भी इसी कथा से जुड़ा है, जहां समुद्र ने श्रीराम से क्षमा मांगी थी। आज जब ये पंचधातु कोदंड अयोध्या पहुंच रहा है, तो ये हमें याद दिलाता है, शक्ति तभी पवित्र है, जब उसका इस्तेमाल सच और न्याय के लिए हो। इसी वजह से ये कोदंड सिर्फ एक धार्मिक चिन्ह नहीं, ये भारतीय संस्कृति, आस्था और राष्ट्रधर्म का जीता-जागता प्रतीक बन गया है।

Keywords: Kodand Of Lord Ram, Ayodhya Ram Temple, Panchdhatu Kodand, Indian Culture, Ramayana Symbolism, Religious Journey India

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