BMC Elections 2026: मुंबई की राजनीति ने बुधवार को एक ऐसा नजारा देखा, जो शायद किसी ने सोचा भी नहीं था। दो दशक पुरानी रंजिशें एक तरफ रखकर, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे आखिरकार एक ही मंच पर साथ आ गए। दोनों ने औपचारिक तौर पर एलान कर दिया, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अब बीएमसी चुनाव मिलकर लड़ेंगे। मुंबई के बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव को वैसे भी शहर की सबसे बड़ी सियासी जंग माना जाता है, और अब जब ठाकरे भाई फिर साथ आए हैं, तो माहौल पूरी तरह बदलने वाला है। लोग इसे सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि एक बड़ा रणनीतिक कदम मान रहे हैं। ठाकरे परिवार की ये एकता मुंबई की राजनीति की धुरी घुमा सकती है।
राज ठाकरे का ऐलान, सीटों पर सस्पेंस बरकरार
गठबंधन का एलान खुद राज ठाकरे ने किया। उन्होंने साफ-साफ कहा कि शिवसेना (यूबीटी) और मनसे साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगी, लेकिन किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी, इसका फॉर्मूला अभी नहीं बताया जाएगा। राज ठाकरे का अंदाज हमेशा की तरह थोड़ा तीखा रहा। उन्होंने कहा, महाराष्ट्र में “राजनीतिक अपहरण” करने वाले लोग बैठे हैं, तो रणनीति वक्त से पहले खोलना ठीक नहीं। उद्धव ठाकरे ने भी यही लाइन पकड़ी। उन्होंने साफ किया, ये साथ बस एक चुनाव के लिए नहीं है, लंबा चलेगा। राज ठाकरे ने एक और बड़ी बात कही कि आने वाला मुंबई का मेयर मराठी होगा, और वही उनके असली एजेंडे की झलक थी।
#WATCH | Mumbai | MNS Chief Raj Thackeray announces the alliance of Shiv Sena (UBT) and MNS ahead of the Municipal Corporation Elections. pic.twitter.com/FW9wtGldzr
— ANI (@ANI) December 24, 2025
बालासाहेब ठाकरे को श्रद्धांजलि, एकता का सीधा संदेश
गठबंधन की घोषणा से पहले दोनों नेता शिवाजी पार्क स्थित स्मारक पर पहुंचे और बालासाहेब ठाकरे को श्रद्धांजलि दी। उनके साथ दोनों की पत्नियां भी थीं। आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे की मौजूदगी ने तस्वीर को और वजनदार बना दिया। राज ठाकरे के घर से लेकर शिवाजी पार्क तक दोनों का साथ-साथ जाना, राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने इस मौके को महाराष्ट्र के लिए “शुभ संकेत” बताया। उन्होंने कहा, ये गठबंधन मराठी अस्मिता और ‘sons of the soil’ की सोच को मजबूत करेगा,यहां जाति-धर्म से ऊपर उठकर बात हो रही है।
उद्धव की सियासी अग्निपरीक्षा, मुंबई की राजनीति की नई दिशा
बीएमसी चुनाव उद्धव ठाकरे के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं। पार्टी टूट चुकी है, सत्ता हाथ से निकल गई है, और अब सबकी नजरें उन्हीं पर हैं। अगर इस बार भी नतीजे कमजोर रहे, तो शिवसेना की विरासत पर उनका दावा डगमगा सकता है, खासकर एकनाथ शिंदे की चुनौती के बीच। मनसे के साथ गठबंधन उद्धव के लिए नया जोश, नया वोट बैंक, और शायद एक नई उम्मीद है। वहीं राज ठाकरे के लिए यह मौका है, मुंबई में फिर से अपनी जमीन जमाने का। चुनाव जैसे-जैसे पास आएंगे, पूरा महाराष्ट्र देखेगा कि ठाकरे भाइयों की ये जोड़ी मुंबई की राजनीति को किस तरफ मोड़ती है।
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