सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक संस्थानों में आवारा कुत्तों को लेकर दिए गए अपने पुराने आदेश में बदलाव से इनकार कर दिया है। अदालत ने डॉग लवर्स की सभी याचिकाएं खारिज करते हुए साफ किया कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को हटाने का आदेश जारी रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एनिमल वेलफेयर बोर्ड की गाइडलाइन के खिलाफ दाखिल सभी याचिकाएं स्वीकार नहीं की जाएंगी। अदालत ने अपने पुराने फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि स्कूल, अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश जारी रहेगा। कोर्ट ने यह भी माना कि अगर राज्यों ने एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों को सही ढंग से लागू किया होता, तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। अदालत ने इसे लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संतुलन से जुड़ा अहम मुद्दा बताया।
डॉग बाइट मामलों पर कोर्ट की सख्त चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि राजस्थान, तमिलनाडु और दिल्ली समेत कई राज्यों से लगातार चिंताजनक आंकड़े सामने आ रहे हैं। कोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर भी कई लोगों और विदेशी पर्यटकों को कुत्तों ने काटा है। अदालत ने माना कि एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों को सही तरीके से लागू नहीं किए जाने के कारण हालात बिगड़े हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि बच्चों समेत बड़ी संख्या में लोग कुत्तों के हमलों का शिकार हो रहे हैं, जो प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
सख्ती के संकेत, राज्यों को चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर उसके निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो राज्यों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। अदालत ने डॉग बाइट की घटनाओं को गंभीर बताते हुए कर्मचारियों की ट्रेनिंग, एंटी-रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता और सड़कों से आवारा जानवरों को हटाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा। कोर्ट ने NHAI को भी हाईवे से आवारा मवेशियों को हटाने और गौशालाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। साथ ही अदालत ने कहा कि जिन खतरनाक या गंभीर रूप से बीमार कुत्तों का इलाज संभव नहीं है, उनके लिए यूथेनेशिया जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।
आवारा कुत्तों पर कोर्ट का सख्त रुख
सुप्रीम Court ने कहा कि उसके आदेशों को लागू कर रहे अधिकारियों के काम में बेवजह दखल नहीं होना चाहिए। अदालत ने सभी हाई कोर्ट्स को निर्देश दिया कि आदेशों का पालन सुनिश्चित कराया जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर जरूरी कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन इलाकों में आवारा कुत्तों की समस्या ज्यादा गंभीर है, वहां विशेषज्ञों की मदद से समाधान निकाला जाए। साथ ही ऐसे संक्रमित और खतरनाक कुत्तों, जिनका इलाज संभव नहीं है, उनके लिए यूथेनेशिया जैसे उपाय अपनाने पर भी विचार करने को कहा गया।
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