एक तरफ ईरान है तो दूसरी तरफ अमेरिका और इजरायल खड़े हैं। दोनों देश मिलकर ईरान पर जबरदस्त हमले कर रहे हैं, वहीं ईरान भी इसका मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। ईरान उन देशों को भी नहीं बख्श रहा जो अमेरिका के समर्थन में खड़े हैं। लगातार ईरानी ड्रोन हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में अमेरिका को लेकर नाराजगी सामने आने लगी है, जिसका असर अब खुलकर दिखाई दे रहा है।
फारस की खाड़ी के देशों ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा है कि इजरायल और अमेरिका ने जल्दबाजी में ईरान पर हमला किया, जिसके कारण उन्हें पूरी तरह से तैयारी करने का मौका नहीं मिला।
उन्होंने शिकायत करते हुए कहा कि अमेरिका ने उनकी उस चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि यह जंग खाड़ी क्षेत्र के लिए भयानक साबित हो सकती है। एक अधिकारी ने बताया कि खाड़ी देश इस बात से नाखुश हैं और कुछ हद तक नाराज भी हैं कि अमेरिकी सेना ने उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
अधिकारी के मुताबिक, खाड़ी देशों में यह धारणा बन गई है कि यह सैन्य अभियान मुख्य रूप से इजरायल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों की रक्षा पर केंद्रित था, जबकि खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा के लिए लगभग अकेला छोड़ दिया गया।
अमेरिका ने कही ये बात
अमेरिका के युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने इजरायल-ईरान संघर्ष को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने मिशन के उद्देश्यों को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जैसे-जैसे उसकी सैन्य बढ़त बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह प्रतिबद्धता और मजबूत होती जा रही है।
हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका के पास रक्षात्मक और आक्रामक हथियारों का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे जरूरत पड़ने पर इस अभियान को लंबे समय तक जारी रखा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने अभी इस लड़ाई की शुरुआत ही की है और वह इसे पूरी ताकत और निर्णायक तरीके से लड़ेगा।
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