गुजरात: सूरत के डुमास इलाके में एक ऐसी घटना हुई है जिसने नशामुक्ति केंद्रों की व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यहां एक 32 साल के युवक, धवल राठौड़, की इलाज के दौरान संदिग्ध हालात में मौत हो गई। परिवार ने उसे 28 फरवरी को नशे की लत छुड़ाने के लिए इस केंद्र में भर्ती कराया था। लेकिन कुछ ही दिनों बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। जब उसे अस्पताल ले जाया गया, तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शुरुआत में सबको लगा कि मौत सामान्य है, मगर जब शरीर पर कई चोट के निशान मिले तो मामला पूरी तरह बदल गया। पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की।
दवा लेने से इनकार करने पर हुई मारपीट
पुलिस के मुताबिक, घटना तब शुरू हुई जब धवल ने दवाएं लेने से इनकार कर दिया। इसी बात पर उसका और कर्मचारियों का झगड़ा हो गया। आरोप है कि स्टाफ ने गुस्से में आकर उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। बताया जा रहा है कि उसे लाठियों से मारा गया जिससे सिर, कमर और शरीर के दूसरे हिस्सों पर गंभीर चोटें आईं। एक मार्च की रात उसकी हालत अचानक बिगड़ी। उसी वक्त केंद्र के कर्मचारियों ने 108 एम्बुलेंस बुलाकर उसे न्यू सिविल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पोस्टमार्टम से साफ हो गया कि मौत की वजह वही गंभीर चोटें थीं। इसके बाद पुलिस ने मामला हत्या का मानकर जांच तेज कर दी।
चार आरोपी गिरफ्तार
सूरत पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए नशामुक्ति केंद्र के चार कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन चारों में दो काउंसलर, एक वार्ड बॉय और एक ड्राइवर शामिल हैं। इनके नाम हैं जिग्नेश देसाई, रोहन संघानी, शैलेश वाघेला और दिलीप जोशी। पुलिस ने इनके खिलाफ हत्या समेत कई गंभीर धाराएं लगाई हैं। जांच में पुलिस ने न सिर्फ कर्मचारियों से बल्कि वहां इलाज करा रहे बाकी मरीजों से भी पूछताछ की, जिसमें मारपीट की बात सामने आई है। अब पुलिस ये भी खंगाल रही है कि क्या पहले भी इस केंद्र में ऐसी घटनाएं हुई हैं या नहीं। इस मामले के बाद नशामुक्ति केंद्रों की निगरानी और मरीजों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने साफ कहा है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी ताकि आगे ऐसा दोबारा न हो।
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