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‘एक पूरे महीने सार्वजनिक शर्मिंदगी, मज़ाक और ट्रोलिंग से गुज़री….’, नए साल पर सोना मोहापात्रा ने शेयर किया पुराना दर्द

गायिका सोना मोहापात्रा ने फेसबुक पोस्ट में एक महीने तक की ट्रोलिंग, शर्मिंदगी और 'कटा हुआ वीडियो कल्चर' पर बात की। उन्होंने इसे समाज की सोच और रचनात्मकता पर असर डालने वाला बताया।

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Sona Mohapatra Latest News: फेमस इंडियन सिंगर सोना मोहापात्रा ने अपने ऑफिसियल फेसबुक पेज पर एक लंबा और इमोशनल पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि बीते एक महीने में उन्हें सोशल मीडिया पर भारी ट्रोलिंग, मज़ाक और सार्वजनिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। ये सब उस वक्त हुआ जब वो एक के बाद एक लाइव शो कर रही थीं, और उनका कॉन्सर्ट सीज़न बहुत बिज़ी चल रहा था। इसके बावजूद, सोना ने हर मंच पर पूरे आत्मविश्वास और खुशी के साथ परफॉर्म किया। उन्होंने साफ कहा, सालों की मेहनत और रियाज़ से जो आत्मविश्वास बनता है, वो किसी वायरल क्लिप से टूट नहीं जाता। हां, उन्होंने ये भी माना कि हर कलाकार इतना मजबूत नहीं होता, और कई लोग इस ट्रोलिंग कल्चर से बुरी तरह प्रभावित होते हैं।

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क्या है पूरा मामला?

सोना ने बताया कि पूरा मामला एक ऐसे इंस्टाग्राम अकाउंट से शुरू हुआ, जो खुद को हिंदुस्तानी संगीत अकादमी बताता है। उन्होंने अपने दिए इंटरव्यू का ज़िक्र किया, जिसमें वो शास्त्रीय और पॉपुलर म्यूज़िक के कनेक्शन पर बात कर रही थीं। असली बातचीत संगीत की परंपरा, रागों की भावना और इस बात पर थी कि शास्त्रीय संगीत आज भी लोगों के दिल में किस तरह बसा है। लेकिन उस पूरी बातचीत को काट-छांटकर एक छोटा सा वीडियो बना दिया गया, जिसमें उनके एक शब्द के उच्चारण को “गलती” के तौर पर दिखाया गया। सोना ने कहा, इस एक क्लिप ने सीरियस बातचीत को मज़ाक और सुधार के खेल में बदल दिया, और उसी से उस इंस्टाग्राम अकाउंट को लाखों व्यूज़ मिल गए।

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ट्रोलर्स की मानसिकता से समाज पर पड़ता गहरा असर

सोना ने अपने पोस्ट में साफ लिखा, ये सिर्फ उनके खिलाफ हमला नहीं है, बल्कि एक बड़ी सोशल प्रॉब्लम है, जिसे साइकोलॉजी में ‘डाउनवर्ड सोशल कंपैरिजन’ कहते हैं। उन्होंने उदाहरण के तौर पर बताया, कैसे किसी स्पोर्ट्सपर्सन की एक गलती, किसी वैज्ञानिक की ज़ुबान फिसलना या महिला नेता का कोई असहज पल, सोशल मीडिया पर तुरंत मज़ाक बन जाता है। लोग दूसरों को नीचा दिखाकर कुछ देर के लिए अच्छा महसूस करते हैं, लेकिन इससे समाज में रिस्क लेने, नया ट्राई करने और खुलकर बोलने का हौसला कम होता जा रहा है।

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2026 के लिए नई उम्मीद

पोस्ट के आखिर में सोना ने उम्मीद जताई कि क्या हम ऐसा समाज बना सकते हैं जहां सुधार से पहले संवेदना हो, और जजमेंट से पहले हर बात का संदर्भ समझा जाए। उन्होंने लिखा, भारतीय संगीत और हमारी सभ्यता हमेशा से गहराई, बारीकी और विरोधाभासों को अपनाने की परंपरा में रही है। हमें ऐसे श्रोता और नागरिक चाहिए जो “गॉचा मोमेंट” के बजाय सीखने और साथ बढ़ने को तैयार हों। सोना ने 2026 के लिए यही दुआ की थोड़ी और उदारता, थोड़ा ज्यादा सुनने की आदत, और बिना डरे आगे बढ़ने की हिम्मत आए। आखिर संगीत का असली मकसद हमें बेहतर इंसान बनाना है।

कौन है सोना मोहापात्रा?

सोना मोहापात्रा एक फेमस इंडियन सिंगर और म्यूजिशियन हैं। वह अपनी मजबूत आवाज़ और विविध संगीत शैलियों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई हिट गाने गाए हैं, जैसे “पानी दा रंग” और “अब तो आपको आना ही पड़ेगा”। सोना मोहापात्रा का संगीत के प्रति प्यार बचपन से था, और उन्होंने अपनी पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी से कम्पलीट की। इसके अलावा, वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं, जहां वह अपनी सोच और सोशल इश्यूज पर भी खुलकर ओपिनियन देती हैं।

Keywords: Sona Mohapatra Facebook Post, Social Media Trolling, Digital Culture, Artists Mental Health, New Year 2026

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