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अब काई से सुलझेगी अपराध की गुत्थी, पढ़ें एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

काई, जो अक्सर नज़रअंदाज़ की जाती है, फोरेंसिक विज्ञान में अहम भूमिका निभा सकती है। इस रिपोर्ट में पढ़ें आखिरकार यह सूक्ष्मजीव बड़े अपराध में कैसे मदद करते है।

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घर और समंदर सहित कई ऐसी जगहें जहां पर काई (Moss) अक्सर दिखाई पड़ जाती है। काई जैसी छोटी चीज़ों पर आमतौर पर हम ध्यान नहीं देते। ये बड़ी आसानी से हमारी नजरों से बच जाती हैं, कभी ज़मीन के इतने करीब कि बस मिट्टी या घास का हिस्सा लगें, और अक्सर नमी या छांव में छुपी रहती हैं। मगर इन मामूली दिखने वाले पौधों की फोरेंसिक विज्ञान में हैरान कर देने वाली अहमियत है। काई असल में ब्रायोफाइट्स नाम के पौधों के समूह में आती है, जिसमें धरती के सबसे सरल पौधे शामिल हैं। इनके पास न असली जड़ें होती हैं, न तना, न बीज। इसके बावजूद, ये अपने आसपास के माहौल से सीधे पानी और पोषक तत्व सोख लेती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं एक छोटी सी काई अपराध की गुत्थी आसानी से सुलझा सकती है। आइए जानते है कैसे।

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फोरेंसिक जांच में काम आती है Moss

ब्रायोफाइट्स की कई किस्में अपने माहौल के बारे में काफी “चूजी” होती हैं। कुछ को बस एक खास टाइप की नमी या मिट्टी चाहिए, तो किसी को बस थोड़ी-सी छाया या तापमान। अब सोचिए, अगर किसी व्यक्ति के जूते, कपड़े या किसी गाड़ी पर काई के छोटे टुकड़े मिलते हैं, तो वो बता सकते हैं कि वो इंसान कहां-कहां गया था। फील्ड म्यूजियम, शिकागो के वनस्पति वैज्ञानिक मैट वॉन कोनराट बताते हैं कि एक ही जगह में भी काई के लिए अलग-अलग सूक्ष्म जगहें होती हैं, जैसे कि पेड़ों की छांव, घास के नीचे या दलदली हिस्से। यही वजह है कि फोरेंसिक एक्सपर्ट्स अपराध स्थल को और ठीक-ठीक समझ पाते हैं।

150 साल पुराना इतिहास, पर कम इस्तेमाल

काई की ये ताकत कोई नई बात नहीं। फिर भी फोरेंसिक जांच में इसका इस्तेमाल बहुत कम हुआ है। वैज्ञानिकों ने पिछले 150 साल के रिकॉर्ड्स देखे तो पाया कि ब्रायोफाइट्स का नाम सिर्फ गिने-चुने मामलों में आया। सबसे पुराना मामला 1929 का मिला, जब एक कंकाल पर उगी काई देखकर मृत्यु का समय अनुमानित किया गया था। इसके बाद फिनलैंड, स्वीडन, इटली, चीन और अमेरिका में करीब दस केस सामने आए, जिनमें काई ने अपराध के समय, जगह या परिस्थिति को समझने में मदद की।

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एक केस जिसने सोच बदल दी

फोरेंसिक वनस्पति विज्ञान की ताकत को सबसे स्पष्ट रूप से दिखाने वाला मामला 2011 का है। अमेरिका में एक बच्ची की हत्या हुई, लेकिन उसका शव काफी समय तक नहीं मिला। पुलिस को सिर्फ इतना पता था कि शव कहीं नॉर्थ मिशिगन में दफन है। बच्ची के जूतों से काई और पौधों के बेहद छोटे अवशेष मिले। वैज्ञानिकों ने इन्हीं सुरागों को पकड़कर जांच शुरू की। 2013 में मैट वॉन कोनराट की टीम ने उस इलाके की काई, घास और पेड़ों की प्रजातियों का पूरा सर्वे किया।

जांच में सामने आया कि जूतों पर जो काई थी, वो कुछ बेहद खास और छोटे-छोटे पर्यावासों में ही मिलती है। सैकड़ों संभावनाओं के बीच, वैज्ञानिकों ने सर्च एरिया इतना छोटा कर दिया कि सात काउंटियों से घटकर मामला सिर्फ 50 वर्ग फुट के हिस्से तक आ गया। आखिरकार, आरोपी पिता ने भी कबूल किया कि शव ठीक उसी जगह दफन था। ये केस दिखाता है कि काई जैसे छोटे पौधे भी जांच को निर्णायक मोड़ दे सकते हैं।

फोरेंसिक वनस्पति विज्ञान का भविष्य

रिसर्चर्स का मानना है कि फोरेंसिक जांच में पौधों, खासकर ब्रायोफाइट्स, को अब और गंभीरता से लेने की जरूरत है। ये सिर्फ वक्त या जगह के बारे में नहीं बताते, कई बार अपराध की असली परिस्थितियां भी उजागर कर देते हैं। एक्सपर्ट्स को भरोसा है कि ऐसे रिसर्च पुलिस और कानून एजेंसियों को सिखाएंगे कि अपराध स्थल पर मिले सबसे छोटे जैविक सुराग को भी अनदेखा न करें। सही मायनों में, काई हमें यह सिखाती है कि कभी-कभी सबसे छोटे सुराग ही सबसे बड़ा सच सामने लाते हैं।

Keywords: Forensic Botany, Moss In Crime Investigation, Forensic Science Research, Crime Scene Analysis

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