आज के दौर में सोशल मीडिया हर उम्र के लोगों की पसंद बन चुका है। इसे देखने वालों में 70 साल के बुजुर्ग भी शामिल हैं और 4 साल के छोटे बच्चे भी। हर व्यक्ति अपनी रुचि के अनुसार कंटेंट देखना पसंद करता है, लेकिन बीते कुछ समय से सोशल मीडिया पर ऐसा कंटेंट तेजी से बढ़ा है, जो बच्चों के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं है।
आज कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अश्लीलता और आपत्तिजनक सामग्री खुलेआम परोसी जा रही है। कार्टून और ज्ञानवर्धक कंटेंट की जगह अब अपराध, अभद्र भाषा और वल्गर शब्दों की भरमार देखने को मिल रही है, जिसका सीधा असर बच्चों की मानसिक सोच और व्यवहार पर पड़ रहा है। इसी कारण दुनिया के कई देशों में सोशल मीडिया पर लगाम लगाने की कवायद शुरू हो चुकी है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया सबसे आगे नजर आता है।
पिछले साल ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बना, जहां 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया। अब इसी दिशा में भारत का एक राज्य भी कदम उठाने की तैयारी में है। दरअसल, आंध्र प्रदेश देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स (पूर्व में ट्विटर) समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बच्चों के लिए बैन करने की योजना पर काम चल रहा है।
बनाई गई कमेटी
- सरकार द्वारा गठित इस कमेटी का मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया को विनियमित करने से जुड़े मौजूदा कानूनों की समीक्षा करना है।
- कमेटी राज्य स्तर पर गलत सूचना, फेक न्यूज और भ्रामक कंटेंट की पहचान और रोकथाम के लिए नए नियम सुझाएगी।
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ फैलाए जा रहे आपत्तिजनक और भ्रामक कंटेंट पर नियंत्रण भी कमेटी के एजेंडे में शामिल है।
- एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा गठित इस कमेटी ने देश के विभिन्न कानूनों और विदेशों में लागू नीतियों का अध्ययन किया है।
- कमेटी ने विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा को लेकर विदेशों में अपनाई जा रही नीतियों की समीक्षा की है।
- रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को अपनाने पर भी विचार किया जा रहा है।
क्यों जरूरी हुई सोशल मीडिया पर लगाम
आंध्र प्रदेश सरकार के सूचना एवं शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने कहा कि बच्चों को कम उम्र में ऑनलाइन कंटेंट के दुष्प्रभावों से बचाना बेहद जरूरी है, क्योंकि वे अभी डिजिटल माध्यमों की जटिलताओं और उनके प्रभाव को समझने की स्थिति में नहीं होते। उन्होंने कहा कि बच्चों की मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है।
नारा लोकेश ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने का संवैधानिक अधिकार केंद्र सरकार के पास है, लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार अपने स्तर पर जरूरी कदम उठाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य के अधिकार क्षेत्र में रहते हुए एक विशेष कानून या नियमावली लाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, ताकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ फैलने वाले आपत्तिजनक कंटेंट पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
इस उद्देश्य से गठित कमेटी में आंध्र प्रदेश की गृह मंत्री वांगलापुड़ी अनीता, स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव और सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री नारा लोकेश सहित कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी शामिल हैं, जो सभी पहलुओं का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेंगे।
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