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जेब हुई खाली तो उतरा मालदीव का ‘इंडिया आउट’ का सुरूर, मोदी इन में बदल गई नीति, जानिए क्या है मजबूरी

मालदीव का फोकस झगड़ों से हटकर सहयोग पर आ गया है। मालदीव को यह समझ आ गया है कि उसे भारत के साथ अपने रिश्तों को सुधारना होगा, क्योंकि भारत के साथ बेहतर संबंध ही उसे आर्थिक संकट से बाहर निकाल सकते हैं।

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PM Modi Maldives Visit: पिछले दो वर्षों में भारत और मालदीव के रिश्तों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। दो साल पहले मालदीव में ‘इंडिया आउट’ के नारे सुनाई पड़ रहे थे। भारत की मौजूदगी का विरोध मालदीव का एक तबका कर रहा था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के चलते अब मालदीव का फोकस झगड़ों से हटकर सहयोग पर आ गया है। मालदीव को यह समझ आ गया है कि उसे भारत के साथ अपने रिश्तों को सुधारना होगा, क्योंकि भारत के साथ बेहतर संबंध ही उसे आर्थिक संकट से बाहर निकाल सकते हैं।

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बीते दो वर्षों में रिश्तों में खटास के बावजूद भारत ने मालदीव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद की है। भारतीय रिजर्व बैंक ने 400 मिलियन डॉलर (3,320 करोड़ रुपये) की करेंसी स्वैप सुविधा के ज़रिए मालदीव की सहायता की, वहीं भारतीय स्टेट बैंक ने 100 मिलियन डॉलर (830 करोड़ रुपये) के मालदीव ट्रेजरी बॉन्ड को सब्सक्राइब किया।

भारत और मालदीव के बीच लंबे समय से हिंद महासागर में व्यापार, सांस्कृतिक संबंध और सुरक्षा को लेकर सहयोग रहा है। मालदीव की रणनीतिक स्थिति और महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों के पास होने के कारण यह भारत के लिए समुद्री सुरक्षा में एक अहम साझेदार है।

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1965 में मालदीव की आज़ादी के बाद भारत पहला देश था जिसने उसके साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए। भारत ने उसे एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी थी। 1988 में जब मालदीव में तख्तापलट का प्रयास हुआ था, तब भारत ने ‘ऑपरेशन कैक्टस’ के ज़रिए समय पर मदद की, जिससे दोनों देशों के संबंध और भी प्रगाढ़ हो गए।

भारत ने आवश्यकता समाप्त होने पर अपनी सेना वापस बुला ली, जिससे मालदीव में भारत के प्रभुत्व को लेकर उठ रही चिंताएं भी कम हुईं। 2004 की सुनामी और 2014 के जल संकट के समय भी भारत सबसे पहले मदद के लिए आगे आया। ये घटनाएँ दर्शाती हैं कि भारत हर मुश्किल समय में मालदीव और उसकी जनता के साथ खड़ा रहा है। जनवरी 2020 में भारत ने मालदीव को खसरे की वैक्सीन की 30,000 डोज़ भेजकर महामारी से लड़ने में मदद की। कोविड-19 के दौरान भी भारत ने मालदीव को त्वरित और पूर्ण सहायता दी।

मालदीव में विपक्षी दलों द्वारा चलाए गए ‘इंडिया आउट’ आंदोलन ने भारत को मालदीव के आंतरिक और सुरक्षा मामलों में दखल देने वाला बताया। इस आंदोलन का दावा था कि भारत की मालदीव के भीतर सैन्य मौजूदगी उसकी संप्रभुता के लिए खतरा है। जबकि सच्चाई यह थी कि भारतीय सुरक्षाबल मालदीव में राहत और बचाव जैसे मानवीय कार्यों में लगे हुए थे।

राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू के सत्ता में आने के बाद नवंबर 2023 में मालदीव ने भारत से दूरी बनानी शुरू की और चीन के करीब जाने का रुख अपनाया। मुइज़्ज़ू ने अपने चुनाव अभियान में इंडिया आउट का नारा दिया था, ताकि भारत के प्रभाव को कम किया जा सके। जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की लक्षद्वीप यात्रा के बाद दोनों देशों के रिश्ते और तनावपूर्ण हो गए। मुइज़्ज़ू के तीन उप-मंत्रियों द्वारा सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणियों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।

मालदीव की लगातार बिगड़ती आर्थिक स्थिति राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के भारत के प्रति नरम रवैये का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है। अगस्त 2024 में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू ने स्वीकार किया कि भारत हमेशा से मालदीव का ‘सबसे करीब और बहुमूल्य साझेदार रहा है, जिसने हर ज़रूरत के समय सहायता की है।

यह कार्यक्रम राष्ट्रपति कार्यालय में आयोजित हुआ था, जहाँ मालदीव के 28 द्वीपों पर बनी जल आपूर्ति और सीवरेज सुविधाओं को औपचारिक रूप से सौंपा गया। ये सभी परियोजनाएँ भारत सरकार की ऋण सुविधा के अंतर्गत भारतीय एक्ज़िम बैंक द्वारा वित्तपोषित थीं।

मालदीव के घटते विदेशी मुद्रा भंडार और बढ़ते आयात खर्च को देखते हुए अक्टूबर 2024 में भारत और भारतीय रिज़र्व बैंक के बीच मुद्रा विनिमय समझौता हुआ। इसके अंतर्गत मालदीव को SAARC ढांचे (2024–2027) के तहत 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर (3,320 करोड़ रुपये) और 30 बिलियन (3,000 करोड़ रुपये) भारतीय रुपये तक की पहुँच दी गई। इसके अतिरिक्त, मई 2025 में मालदीव सरकार के अनुरोध पर 50 मिलियन डॉलर (415 करोड़ रुपये) के ट्रेजरी बिल को आगे बढ़ाया गया, और मार्च 2025 में भारत ने 69 मिलियन डॉलर (572.7 करोड़ रुपये) की अनुदान सहायता देने का भी वादा किया।

2025 की शुरुआत में मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील और रक्षा मंत्री घस्सान मौमून की भारत यात्रा दोनों देशों के संबंधों में सुधार की दिशा में एक अहम कदम साबित हुई। जब पिछले वर्ष भारत-मालदीव संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर थे, तब इन उच्चस्तरीय यात्राओं ने एक सकारात्मक संकेत दिया।

विदेश मंत्री खलील ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट कहा कि मौजूदा सरकार, पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के ‘इंडिया आउट’ अभियान से अलग है। हालाँकि, उस समय विपक्ष में रहते हुए उन्होंने उसमें भाग लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि अब सरकार किसी भी नेता की भारत-विरोधी टिप्पणी से खुद को पूरी तरह अलग रखेगी, चाहे वह नेता सरकार से हो या विपक्ष से। खलील के अनुसार, राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू का उद्देश्य भारत और भारतीय जनता के साथ रिश्तों को मजबूत करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद ने रिश्तों को एक नया मोड़ दिया है।

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