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भारत ने सिंधु जल संधि पर अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले को किया खारिज, पाकिस्तान को फिर दी सख्त चेतावनी

भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर हेग स्थित कथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है। भारत ने साफ कहा कि वह इस फैसले को नहीं मानता और अपनी स्थिति पर कायम रहेगा।

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Indus Waters Treaty: भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर हेग स्थित कथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (CoA) के हालिया निर्णय को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। भारत का कहना है कि यह अदालत अवैध रूप से गठित है और इसका कोई कानूनी आधार नहीं है। इसलिए इसके किसी भी आदेश या फैसले को भारत स्वीकार नहीं करता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि 15 मई 2026 को अधिकतम जल भंडारण क्षमता से जुड़े मामले में दिया गया यह फैसला भी भारत के लिए मान्य नहीं है।

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भारत ने दोहराया है कि वह इस तथाकथित फैसले को पूरी तरह अस्वीकार करता है, जैसा कि पहले दिए गए सभी निर्णयों के साथ भी किया गया था। भारत का कहना है कि उसने कभी भी इस अदालत के गठन को मान्यता नहीं दी। ऐसे में इस संस्था की किसी भी कार्यवाही, आदेश या निर्णय का कोई कानूनी आधार नहीं है और यह पूरी तरह शून्य और अमान्य माना जाएगा।

भारत का रुख कायम, सिंधु जल संधि पर स्थगन जारी

भारत ने साफ किया है कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का उसका फैसला अभी भी लागू है। यह संधि 19 सितंबर 1960 को भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे के लिए हुई थी। भारत ने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इसे स्थगित किया था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक यह स्थगन जारी रहेगा।

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भारत ने संप्रभु अधिकारों पर दी सख्त प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय ने जून 2025 में स्पष्ट किया था कि जब तक सिंधु जल संधि स्थगित है, भारत इसके तहत किसी भी दायित्व को पूरा करने के लिए बाध्य नहीं है। भारत ने यह भी कहा कि कोई भी कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन, विशेष रूप से अवैध रूप से गठित निकाय, भारत के संप्रभु अधिकारों के तहत लिए गए फैसलों की वैधता पर सवाल नहीं उठा सकता।

किशनगंगा और रतले परियोजनाओं पर पहले भी विवाद

पिछले साल विदेश मंत्रालय ने तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन की आलोचना की थी, जब उसने जम्मू-कश्मीर की किशनगंगा और रतले जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर अपने अधिकार क्षेत्र पर “सप्लीमेंटल अवॉर्ड” जारी किया था। भारत ने उस समय भी स्पष्ट किया था कि उसने इस कथित अदालत को कभी कानूनी रूप से स्वीकार नहीं किया। भारत का मानना है कि इस मध्यस्थता निकाय का गठन ही सिंधु जल संधि का उल्लंघन है और इसके सभी निर्णय और कार्यवाही अवैध हैं।

भारत का पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय मंचों के दुरुपयोग का आरोप

भारत ने पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय मंचों का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की “फर्जी मध्यस्थता प्रक्रिया” का सहारा लेना पाकिस्तान की पुरानी नीति का हिस्सा है, जो धोखाधड़ी और मंचों के दुरुपयोग पर आधारित है। भारत का यह भी कहना है कि पाकिस्तान ऐसे कदमों के जरिए खुद को आतंकवाद के वैश्विक केंद्र के रूप में उसकी जिम्मेदारी से बचाने की कोशिश करता है।

Keywords: Indus Waters Treaty dispute, India rejects Court of Arbitration ruling, India Pakistan water treaty suspension policy

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