नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अहम बयान दिया। उन्होंने कहा, “भारत का दृष्टिकोण हमेशा स्पष्ट रहा है। हम हमेशा शांति और स्थिरता की ओर काम करते रहे हैं। पश्चिम एशिया की स्थिति हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय है। हमें विश्वास है कि संवाद के माध्यम से ही समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। इस क्षेत्र में रह रहे सभी भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हम अन्य देशों के साथ मिलकर प्रयास करते रहेंगे।”
भारत-कनाडा रिश्तों को नया रास्ता
इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से मुलाकात की। ये बैठक भारत-कनाडा के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार देने के लिए अहम मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, दोनों देशों ने अपने रिश्ते को “नेक्स्ट लेवल पार्टनरशिप” तक ले जाने पर बातचीत की है। उन्होंने बताया, 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का टारगेट तय किया गया है। ये सिर्फ नंबर नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच भरोसे और लंबे समय तक साथ काम करने की मिसाल भी है। बैठक में एजुकेशन, टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी और एग्रीकल्चर जैसे सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। दोनों इस बात पर भी सहमत हुए कि बदलती ग्लोबल इकॉनमी में आपसी सहयोग से नए मौके निकल सकते हैं।
व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर सहमति
मोदी ने ये भी ऐलान किया कि भारत और कनाडा जल्द ही एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement) को फाइनल करने जा रहे हैं। इस समझौते से दोनों देशों के बीच इन्वेस्टमेंट, व्यापार की सहजता और बाजार तक पहुंच और मजबूत होगी। उनके मुताबिक, इससे सिर्फ व्यापार ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि रोजगार और निवेश के नए रास्ते भी खुलेंगे। खास बात ये रही कि मोदी ने कनाडा के पेंशन फंड्स द्वारा भारत में करीब 100 अरब डॉलर के निवेश का जिक्र किया। ये निवेश दिखाता है कि भारत की तरक्की और आर्थिक स्थिरता में कनाडाई संस्थाएं कितना भरोसा करती हैं।
प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों के नेता कारोबारी दुनिया के लोगों से भी मिलेंगे। इन बैठकों का मकसद है, प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी बढ़ाना और उनके सुझावों के आधार पर मजबूत सहयोग की नींव रखना। भारत और कनाडा, दोनों ही बहुसांस्कृतिक लोकतंत्र हैं। शिक्षा, स्किल डेवेलपमेंट और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में इनके पास काफी संभावनाएं हैं। पश्चिम एशिया के मसले पर जहां भारत ने संयम और बातचीत को तरजीह दी है, वहीं कनाडा के साथ अपने आर्थिक रिश्तों के लिए भी सीधा और मजबूत प्लान सामने रखा है। मौजूदा ग्लोबल हालात में भारत का ये बैलेंसिंग ऐक्ट बताता है कि एक तरफ वो शांति और स्थिरता की बात करता है, तो दूसरी ओर अपने आर्थिक हितों को भी पूरी रणनीति के साथ आगे बढ़ा रहा है।
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