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14वी बार जेल से बाहर आएगा गुरमीत राम रहीम, कोर्ट ने 40 दिन की पैरोल की मंजूर, 2017 से है सुनारिया जेल में है बंद

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम, जो रेप और हत्या के मामलों में सजा काट रहा है, को 40 दिन की पैरोल मिली है। रोहतक की सुनारिया जेल से अस्थायी रिहाई ने नई बहस को जन्म दिया है।

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Gurmeet Ram Rahim News: रोहतक की सुनारिया जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को शनिवार शाम 40 दिन की पैरोल मिल गई। अब वो फिर सिरसा के डेरे के लिए निकलेंगे। वैसे ये पहली बार नहीं है जब राम रहीम जेल से बाहर आ रहे हैं। अगस्त 2025 में भी उन्हें 40 दिन की पैरोल मिली थी, और अप्रैल में 21 दिन की फरलो। अब तक ये 14वीं बार है जब उन्हें किसी न किसी वजह से अस्थायी रिहाई मिली है। इतनी बार बाहर आने-जाने से आम लोग हैरान हैं, सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बार-बार ये छूट कैसे मिल रही है?

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बार-बार पैरोल पर क्यों उठ रहे सवाल

राम रहीम को बार-बार मिल रही पैरोल और फरलो अब सिर्फ अदालत की बात नहीं रही, ये समाज और नैतिकता का मुद्दा भी बन गई है। आम लोग और सामाजिक संगठन मानते हैं कि रेप और हत्या जैसे मामलों में दोषी को इतनी बार राहत मिलना सही नहीं है। प्रशासन हर बार यही कहता है कि पैरोल नियमों के मुताबिक दी जाती है, मगर इस बार भी 40 दिन की छुट्‌टी किस वजह से मिली, ये किसी ने साफ नहीं बताया। जिसका नतीजा ये हुआ, पारदर्शिता पर शक और गहरा गया है।

राम रहीम जेल में क्यों हैं?

अगस्त 2017 में पंचकूला की सीबीआई कोर्ट ने राम रहीम को दो साध्वियों के यौन शोषण में मामले में गिरफ्तार किया। इस मामले में रहीम को 10 साल की सजा और जुर्माना लगा। इसके अलावा, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या में भी वे दोषी पाया गया। सीबीआई के मुताबिक, यौन शोषण की घटनाएं 1999 की हैं, लेकिन पीड़िताओं ने 2005 में बयान दिए। लंबी जांच और सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया। इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए राम रहीम की सजा को भारतीय न्याय व्यवस्था में एक अहम उदाहरण माना गया था।

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पैरोल क्या होती है? नियम क्या कहते हैं?

पैरोल एक कानूनी तौर-तरीका है, जिसमें कैदी को सजा के दौरान कुछ वक्त के लिए शर्तों के साथ जेल से बाहर रहने की इजाजत मिलती है। मकसद यही कि कैदी को खास हालात में परिवार या समाज के बीच थोड़ी राहत मिल जाए। इस दौरान कैदी को तय जगह पर ही रहना होता है, लोकेशन बदल नहीं सकते, और किसी भी गैर-कानूनी काम से दूर रहना जरूरी है। पैरोल अधिकारी से मिलना और तय वक्त पर वापस जेल लौटना भी जरूरी है। कानून पैरोल की इजाजत तो देता है, लेकिन जब किसी को बार-बार ये राहत मिले, तो इंसाफ की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। राम रहीम का मामला अब इसी बहस का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।

Keywords: Gurmeet Ram Rahim, Dera Sacha Sauda, Ram Rahim Parole, Rape Conviction India, Indian Parole Law, Ram Rahim Furlough

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