अयोध्या, भगवान राम की पवित्र नगरी, आज 8 अक्टूबर 2025 को एक खास मौके की गवाह बनेगी। यहां दक्षिण भारत के तीन महान संतों—पुरंदर दास, त्यागराज और अरुणाचल कवि—की मूर्तियों का अनावरण होगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बृहस्पति कुंड पर यह कार्यक्रम करेंगी, और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहेंगे। ये संत रामभक्ति और कर्नाटक व तमिल संगीत के प्रतीक हैं। उनकी रचनाएं आज भी भक्तों के दिलों में बस्ती हैं। अयोध्या में इनकी मूर्तियां लगने से उत्तर और दक्षिण भारत की आध्यात्मिक एकता और मजबूत होगी।
पुरंदर दास: भक्ति संगीत के जनक
पुरंदर दास को कर्नाटक संगीत का पितामह कहा जाता है। उनका जन्म 1484 में कर्नाटक के शिमोगा जिले के अरागा गांव में हुआ। पहले वे श्रीनिवास नायक थे और हीरे का व्यापार करते थे। लेकिन एक दिन एक ब्राह्मण को भिक्षा न देने का पछतावा हुआ। उन्होंने सब छोड़कर संत व्यास तीर्थ का शरण लिया। गुरु ने उन्हें पुरंदर विठ्ठल नाम दिया। उन्होंने लगभग 4,75,000 भक्ति गीत लिखे, जिनमें से 1000 ही आज बचे हैं। उनके गीत संस्कृत और कन्नड़ में हैं, जो भगवान विष्णु और कृष्ण की महिमा गाते हैं। उनकी रचनाएं संगीत की बुनियाद हैं।
त्यागराज: राम के परम भक्त
त्यागराज कर्नाटक संगीत की त्रिमूर्ति में से एक हैं। उनका जन्म 1767 में तमिलनाडु के तिरुवरूर में हुआ। बचपन से ही संगीत में रुचि थी। वे वेंकट रामनैया के शिष्य बने। त्यागराज ने राम के लिए सैकड़ों गीत रचे, जिनमें पंचरत्न कृतियां सबसे प्रसिद्ध हैं। ये पांच गीत राम की भक्ति में डूबे हैं। उन्होंने सांसारिक सुख ठुकराए और तंजावुर में सादा जीवन जिया। राजा के दरबार में जाने से मना कर दिया। उनकी तेलुगु रचनाएं आज भी गाई जाती हैं। उनकी मृत्यु 1847 में हुई।
अरुणाचल कवि: राम नाटकम का रचयिता
अरुणाचल कवि तमिल संगीत और काव्य के माहिर थे। उनका जन्म 1711 में तमिलनाडु के तिल्लैयाड़ी में हुआ। 12 साल की उम्र में पिता का देहांत हो गया। वे धर्मपुरम अधीनम मठ में पढ़े। बाद में जौहरी बने, लेकिन रामभक्ति ने उन्हें संगीत की ओर खींचा। उन्होंने राम नाटकम रचा, जो रामकथा पर आधारित नाटक है। उनकी रचनाएं तमिल में हैं। वे मुथु थंडावर और मरिमुत्तु पिल्लई के साथ तमिल संगीत की त्रिमूर्ति हैं। उनकी मृत्यु 1779 में हुई।
अयोध्या में भक्ति की एकता
ये तीनों संत रामभक्ति और संगीत के जरिए भारत को जोड़ते हैं। अयोध्या में उनकी मूर्तियां लगने से दक्षिण और उत्तर की सांस्कृतिक एकता मजबूत होगी। बृहस्पति कुंड पर यह अनावरण राम मंदिर के बाद आध्यात्मिक पर्यटन को और बढ़ाएगा। निर्मला सीतारमण और योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी इस मौके को खास बनाएगी।
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