दक्षिण अफ्रीका में पहली बार आयोजित किए गए G20 शिखर सम्मेलन 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक विकास के मौजूदा मॉडल पर गंभीर सवाल उठाए और विकास के पैमानों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। पीएम मोदी 21- 23 नवंबर तक जोहान्सबर्ग में चल रहे 3 दिवसीय समिट में भाग ले रहे हैं। ‘सभी को साथ लेकर समावेशी और सतत आर्थिक विकास’ विषय पर आयोजित सत्र में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान विकास मॉडल ने विश्व की बड़ी आबादी को संसाधनों से वंचित कर दिया है और प्रकृति के शोषण को बढ़ावा दिया है।
विकास के पैमानों पर फिर से विचार की जरूरत: PM मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि दशकों तक G20 ने वैश्विक वित्त और आर्थिक विकास को दिशा दी, लेकिन इसके परिणामस्वरूप विकास संसाधन-संपन्न और वंचित देशों के बीच दूरी बढ़ी। उन्होंने कहा कि अफ्रीका इसका सबसे बड़ा भुक्तभोगी रहा है, और जब अफ्रीका पहली बार G20 की मेजबानी कर रहा है, तब यह समय है कि हम विकास मॉडल को पुनर्परिभाषित करें। उन्होंने विश्व को भारत के सभ्यता-आधारित दृष्टिकोण इंटेग्रल ह्यूमनिज्म को अपनाने का सुझाव दिया, जिसमें मानव, समाज और प्रकृति तीनों को एकीकृत रूप में देखने की बात कही गई है।
पारंपरिक,पर्यावरण-संतुलित जीवनशैली से सीखने की अपील
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के कई समुदाय आज भी अपनी परंपरागत, पर्यावरण-संतुलित जीवनशैली को संरक्षित किए हुए हैं, जिनमें स्थिरता के साथ-साथ सांस्कृतिक ज्ञान, सामाजिक एकता और प्रकृति के प्रति सम्मान देखने को मिलता है। ग्लोबल ट्रेडिशनल नॉलेज रिपोजिटरी बनाने का प्रस्ताव अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने G20 के तहत एक ग्लोबल ट्रेडिशनल नॉलेज रिपोजिटरी बनाने का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि भारत का Indian Knowledge Systems Initiative इस प्लेटफॉर्म का आधार बन सकता है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों तक मानवता के सामूहिक ज्ञान को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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