नेशनल कॉन्फ्रेंस NC के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर में हुए राज्यसभा चुनावों को लेकर एक बड़ा राजनीतिक खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि इन चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी ने उनकी पार्टी से संपर्क किया था और सीटों के बंटवारे का एक गोपनीय प्रस्ताव दिया था, जिसे नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सिरे से खारिज कर दिया।
श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान फारूक अब्दुल्ला ने कहा वे हमारे पास आए और कहा चुनाव में मत आओ, हमें सीटें दे दो और एक सीट ले लो। लेकिन हमने मना कर दिया। हम मैदान में उतरे और चुनाव लड़ा।
NC ने जीतीं 3 सीटें, कांग्रेस-पीडीपी को कहा ‘शुक्रिया’
जम्मू-कश्मीर की राज्यसभा की 4 सीटों के लिए हुए इस चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 3 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि भाजपा को एक सीट मिली है। यह चुनाव राज्य में राजनीतिक समीकरणों और गठबंधनों के बदलाव के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
फारूक अब्दुल्ला ने एनसी उम्मीदवारों को समर्थन देने के लिए कांग्रेस, पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) और कुछ निर्दलीय विधायकों का खुलकर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, यह उनके समर्थन के कारण ही हम तीन सीटें जीत पाए। अब्दुल्ला ने विशेष रूप से महबूबा मुफ्ती की पार्टी, कांग्रेस और लंगेट और शोपियां के निर्दलीय विधायकों का धन्यवाद किया।
‘फिक्स्ड मैच’ और चौथी सीट हारने की अटकलों को किया खारिज
जब अब्दुल्ला से पूछा गया कि चौथी सीट हारने के पीछे क्या गलत कैलकुलेशन या तैयारी की कमी थी, तो उन्होंने इन अटकलों को केवल ‘प्रचार’ बताकर खारिज कर दिया। उन्होंने पलटवार करते हुए पूछा कि अगर हमने तैयारी नहीं की होती, तो हमें 27 वोट कैसे मिलते?
उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस और दूसरी पार्टियों के बीच किसी भी तरह के ‘फिक्स्ड मैच’ की अटकलों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि आरोप तो हमेशा लगते रहे हैं, पैगंबरों पर भी लगे हैं। हम आम लोग हैं। हमें ऐसी बातों का सामना करना पड़ेगा।
राज्यसभा में गूंजेगी जम्मू-कश्मीर की आवाज़
फारूक अब्दुल्ला ने यह भी दोहराया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नवनिर्वाचित तीनों राज्यसभा सदस्य ऊपरी सदन में जम्मू-कश्मीर की आवाज़ उठाएंगे और लोगों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। उन्होंने कहा कि आप देखेंगे कि वे कौन से मुद्दे उठाते हैं।
हालांकि, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने एक तरफ कांग्रेस और पीडीपी का शुक्रिया अदा किया है, वहीं कुछ निर्दलीय विधायकों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं जिन्होंने कथित तौर पर बीजेपी को समर्थन दिया।
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