भारत में अब इलेक्ट्रिक बसों की संख्या में बड़ी वृद्धि होने वाली है। एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) की सहायक कंपनी CESL ने 6 नवंबर को 10,900 नई ई-बसों के लिए टेंडर जारी करने की घोषणा की है, जो देश का अब तक का सबसे बड़ा ई-बस टेंडर है। इस योजना के तहत दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, सूरत और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में नई इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी। यह पहल भारत की स्वच्छ ऊर्जा नीति और ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट’ मिशन को मजबूत करेगी। CESL का उद्देश्य इस प्रोजेक्ट के माध्यम से शहरों के परिवहन में पर्यावरण के अनुकूल बदलाव लाना है।
बेंगलुरु को मिलेगी सबसे ज्यादा बसें
CESL के अनुसार इस टेंडर में देशी और विदेशी दोनों कंपनियों ने गहरी रुचि दिखाई है। कंपनी ने बोली प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक बनाने के लिए सभी तकनीकी और प्रक्रियात्मक सवालों का समाधान किया है। योजना के तहत बेंगलुरु को 4,500, दिल्ली को 2,800, हैदराबाद को 2,000 और सूरत व अहमदाबाद को कुल 1,600 इलेक्ट्रिक बसें मिलेंगी। इन बसों से रोजाना लाखों यात्रियों को स्वच्छ, शांत और आधुनिक यात्रा का अनुभव मिलेगा। साथ ही, यह शहरों में वायु प्रदूषण और ईंधन लागत को भी कम करने में मदद करेगा।
दिल्ली से छोटे शहरों तक ई-बसों का विस्तार
देश की राजधानी दिल्ली इलेक्ट्रिक बसों की दिशा में काफी आगे बढ़ चुकी है। दिल्ली परिवहन निगम (DTC) ने पुरानी सीएनजी बसों को धीरे-धीरे ई-बसों से बदलना शुरू कर दिया है। छोटी दूरी वाले मार्गों की बसें अब “DEVI प्रोजेक्ट” के तहत पूरी तरह इलेक्ट्रिक हैं। सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि जयपुर, लखनऊ, नागपुर, इंदौर, चंडीगढ़ जैसे कई छोटे और बड़े शहरों में भी इलेक्ट्रिक बसों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से यह बदलाव स्वच्छ और सतत सार्वजनिक परिवहन का नया युग लेकर आ रहा है।
स्वच्छ गतिशीलता का भविष्य
CESL के प्रवक्ता के अनुसार, “10,900 इलेक्ट्रिक बसों का यह टेंडर भारत की स्वच्छ गतिशीलता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रदूषण कम होगा और शहरों में यात्रा और अधिक शांत, सुरक्षित और सुविधाजनक बनेगी।” कंपनी ने बताया कि इस प्रक्रिया को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल और नवाचारी वित्तीय ढांचे के तहत आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि ई-बसों के संचालन और रखरखाव में कोई रुकावट न आए। यदि यह योजना सफल रही, तो भारत न केवल एशिया बल्कि विश्व के उन अग्रणी देशों में शामिल हो जाएगा, जहां सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह स्वच्छ ऊर्जा पर आधारित होगा।
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