संसद के शीतकालीन सत्र के सातवें दिन माहौल काफी गरम रहा। वंदे मातरम् और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। लोकसभा में चर्चा के बाद राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने वंदे मातरम् पर बोलना शुरू किया। उन्होंने कहा कि दोनों सदनों में इस गीत पर हो रही चर्चा आने वाली पीढ़ियों को इसके महत्व के बारे में ज़्यादा समझ देगी और देश के विकास में नई प्रेरणा पैदा करेगी।
अमित शाह ने आगे कहा कि वंदे मातरम् ने उस समय देशवासियों में नई ऊर्जा जगाई थी, जब लोग अपनी क्षमता को भूल चुके थे। महर्षि अरविंद ने भी इस गीत को भारत के “पुनर्जन्म का मंत्र” बताया था। शाह ने याद दिलाया कि अंग्रेजों द्वारा पाबंदी लगाने के बावजूद बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था कि उनका सारा साहित्य भले ही नष्ट कर दिया जाए, लेकिन वंदे मातरम् हमेशा जिंदा रहेगा और लोगों को प्रेरित करता रहेगा।
उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर चर्चा से बचता है। शाह ने कहा कि किसी भी विषय पर बात करने से सरकार नहीं डरती और संसद का बहिष्कार करना उनका तरीका नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जब वंदे मातरम् के 50 साल पूरे हुए थे, तब देश आज़ाद नहीं था, और आज़ादी के बाद जब इसकी 50वीं वर्षगांठ आई, तब जवाहरलाल नेहरू ने इसके केवल दो छंद गाने की बात कही थी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने आज़ादी की लड़ाई के दौरान वंदे मातरम् को देशभक्ति के नारे के रूप में अपनाया था। उन्होंने कहा कि बीजेपी का इतिहास हमेशा आज़ादी के आंदोलनों और उनसे जुड़े गीतों पर सवाल उठाने का रहा है।
खरगे ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लगातार जवाहरलाल नेहरू को निशाना बनाते हैं। उन्होंने बताया कि जिस प्रस्ताव में वंदे मातरम् के पहले दो छंद को ही गाने की बात कही गई थी, वह कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने मिलकर पास किया था, जिसमें नेहरू, गांधी, मौलाना आज़ाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, पटेल और पंत जैसे बड़े नेता शामिल थे। खरगे के अनुसार, यह एक सामूहिक फैसला था, इसलिए केवल नेहरू को निशाना बनाना गलत है।
Keywords:– Vande Mataram Immortal Creation, Dedication Towards Mother India, 150th Anniversary Debate

