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नई दिल्ली में रूसी फ़िल्म महोत्सव ने बढ़ाई सहयोग की रफ़्तार, भारत–रूस के बीच संयुक्त फ़िल्म निर्माण को मिली नई दिशा

नई दिल्ली में हुए रूसी फिल्म महोत्सव ने भारतीय दर्शकों को आधुनिक रूसी सिनेमा से परिचित कराया और भारत-रूस फिल्म उद्योगों के बीच सहयोग, सांस्कृतिक साझेदारी को नया दिशा दी।

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नई दिल्ली में 5 से 7 दिसंबर 2025 तक आयोजित रूसी फिल्म महोत्सव ने भारत और रूस के बीच कला और सिनेमा के रिश्तों को और मजबूत किया। यह तीन दिवसीय इवेंट रूस के संस्कृति मंत्रालय और रोस्किनो द्वारा आयोजित किया गया था। महोत्सव के भव्य उद्घाटन में रूस की संस्कृति मंत्री ओल्गा लुबिमोवा का वीडियो संदेश दिखाया गया। इसके अलावा, गज़प्रोम मीडिया होल्डिंग के सीईओ अलेक्ज़ेंडर झारोव, रोस्किनो की सीईओ एल्या अन्तोनोवा और अभिनेता किरिल कुज़नेत्सोव ने दर्शकों का स्वागत किया। इस कार्यक्रम ने भारत-रूस की साझेदारी को और मजबूत किया।

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अलग-अलग फ़िल्मों की प्रस्तुति और दर्शकों का अनुभव

इस साल के महोत्सव का मुख्य आकर्षण रहा आधुनिक रूसी सिनेमा की नई और रोचक कहानियां। महोत्सव की शुरुआत युद्ध पर आधारित फिल्म “ऑगस्ट” से हुई, जिसने दर्शकों को एक गहरी और सशक्त भावनात्मक अनुभव दिया। इसके बाद “ब्लड टाइप”, “पर्ल (2025)”, “फ़र्स्ट ऑन ओलिम्पस (2025)” और “डॉक्टर दीनोज़ाव्रोव” जैसी फिल्मों ने विभिन्न विषयों को छुआ, जैसे थ्रिलर, ह्यूमन इंटरेस्ट ड्रामा और फॅमिली ड्रामा। इन फिल्मों ने भारतीय दर्शकों को रूसी सिनेमा की हाई क्वालिटी, टेक्नोलॉजिकल मैच्योरिटी और न्यू सब्जेक्ट मैटर्स से हूबहू कराया। यह दिखाता है कि कहानी कहने की कला अब राष्ट्रीय सीमाओं से परे जा चुकी है।

उद्योग कार्यक्रमों से मजबूत हुई साझेदारी

महोत्सव के दौरान आयोजित उद्योग कार्यक्रम ने दोनों देशों के फिल्म विशेषज्ञों, निर्माताओं और कलाकारों को एक मंच पर लाया। क्वेश्चन-आंसर सेशन, राउंड टेबल डिसकसन और कंसल्टेशन मीटिंग्स में भारत और रूस के बीच संयुक्त निर्माण, वितरण और रचनात्मक सहयोग पर विस्तृत चर्चा की गई। सबसे अहम सेशन था “सिनेमा एक सांस्कृतिक सेतु के रूप में”, जिसे रूसी–भारतीय मंच के सहयोग से आयोजित किया गया। यह सेशन ओपन यूरेशियन फिल्म अवॉर्ड प्रेजेंटेशन का हिस्सा था, जिसमें फिल्म को सामाजिक–सांस्कृतिक कनेक्ट के रूप में देखने और इसके माध्यम से वैश्विक दर्शकों तक साझा मूल्यों को पहुंचाने पर जोर दिया गया। भारतीय और रूसी विशेषज्ञों ने सहमति जताई कि दोनों देशों की कहानी कहने की परंपराएं मिलकर वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली काम कर सकती हैं।

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भविष्य के संयुक्त निर्माण की दिशा

महोत्सव के दौरान, रोस्किनो की सीईओ एल्या अन्तोनोवा ने भारत के साथ सहयोग के प्रति आशावाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारतीय और रूसी संस्कृतियों में समान संवेदनाएन हैं, जो भविष्य में बड़ी और नई संयुक्त फिल्म परियोजनाओं को जन्म देंगी। एल्या ने यह भी स्पष्ट किया कि रोस्किनो केवल रूसी सिनेमा को प्रदर्शित करने नहीं, बल्कि रचनात्मक साझेदार खोजने के लिए भारत आई है। रूस, भारत और यूरेशियाई देशों के फिल्म निर्माताओं की उपस्थिति और उत्साही भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही सिनेमा का भविष्य है। 100 वर्षों का इतिहास रखने वाला रोस्किनो, जो सोवएक्सपोर्टफ़िल्म की परंपरा को आगे बढ़ाता है, आज भी विश्वभर में रूसी ऑडियो–विज़ुअल उद्योग का प्रमुख प्रतिनिधि है। नई दिल्ली में हुआ यह महोत्सव न केवल सांस्कृतिक सेतु बना, बल्कि भारत–रूस फिल्म सहयोग की मजबूत नींव भी रख गया।

क्या है रोस्किनो?

रोस्किनो रूस के ऑडियो-विसुअल उद्योग का आधिकारिक राज्य संगठन है, जो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों और बाजारों में रूस को रिप्रेजेंट करता है। यह संस्था संघीय संपत्ति प्रबंधन एजेंसी के तहत काम करती है। 2024 में, रोस्किनो ने अपने 100 वर्षों का सफर पूरा किया और यह 1924 में स्थापित सोवएक्सपोर्टफ़िल्म की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। रोस्किनो रूस के सिनेमा और ऑडियो–विज़ुअल उद्योग का प्रमुख संस्थान है, जो वैश्विक स्तर पर रूस की फिल्म इंडस्ट्री का चेहरा बनता है।

Keywords: Russian Film Festival, India-Russia Collaboration, Modern Russian Films, Indo-Russian Relations, Film Distribution

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