असम सरकार कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। असम सरकार ने तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर कर पवन खेड़ा को ट्रांजिट अग्रिम जमानत देने के निर्णय को चुनौती दी है। बता दें कि पवन खेड़ा को तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक हफ्ते के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी रिंकी सरमा से जुड़े आरोपों के मामले में दर्ज केस को लेकर पवन खेड़ा को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें एक सप्ताह की अंतरिम अग्रिम जमानत दी है, ताकि वे कानूनी प्रक्रिया पूरी कर सकें।
वहीं, असम सरकार ने इस मामले को गंभीर मानते हुए सर्वोच्च न्यायालय में जल्द सुनवाई की मांग की है। सरकार की ओर से मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत से इस मुद्दे पर शीघ्र सुनवाई करने का अनुरोध किया गया है, ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।
राहुल गांधी ने असम के सीएम पर साधा निशाना…
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि असम के वर्तमान मुख्यमंत्री देश के सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्रियों में से हैं। वे कानून से बच नहीं पाएंगे। अपने राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों को परेशान करने के लिए राज्य की शक्ति का दुरुपयोग करना संविधान के खिलाफ है। जो सवाल उठाए जा रहे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पारदर्शिता, सत्ता की जवाबदेही और कानून का राज हमारे संवैधानिक मूल्यों की आधारशिला हैं। कांग्रेस पार्टी पवन खेड़ा के साथ खड़ी है। हम डरने या दबने वाले नहीं हैं।
The present CM of Assam is the most corrupt in the country. He will not escape the law. His abuse of state power to harass his political opponents and critics is against the Constitution.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) April 13, 2026
The questions that are being raised have to be probed. Transparency, accountability of…
कोर्ट की शर्तें इस प्रकार थीं:
- एक सप्ताह की समयसीमा: 7 दिनों के भीतर असम की संबंधित अदालत में नियमित अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करना अनिवार्य है।
- व्यक्तिगत मुचलका: गिरफ्तारी की स्थिति में ₹1 लाख का व्यक्तिगत मुचलका और समान राशि के दो जमानती प्रस्तुत करने होंगे।
- जांच में सहयोग: जब भी जांच अधिकारी बुलाएं, पूछताछ के लिए उपस्थित होना होगा और पूरी तरह सहयोग करना होगा।
- सबूतों से छेड़छाड़ पर रोक: किसी भी साक्ष्य से छेड़छाड़ नहीं करेंगे, गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे और न ही किसी को लालच, धमकी या किसी प्रकार का वादा देंगे।
- विदेश यात्रा पर रोक: अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
- सार्वजनिक बयान पर संयम: मामले से जुड़े किसी भी मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी या बयान नहीं देंगे।
क्या है पूरा मामला?
पूरा विवाद 5 अप्रैल को दिए गए उस बयान से शुरू हुआ, जब पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी रिंकी सरमा के पास एक से अधिक पासपोर्ट हैं और विदेशों में संपत्ति भी है, जिसकी जानकारी कथित तौर पर चुनावी हलफनामे में नहीं दी गई। इस बयान के सामने आते ही मामला राजनीतिक और कानूनी विवाद में बदल गया।
आरोपों के बाद गुवाहाटी क्राइम ब्रांच ने पवन खेड़ा के खिलाफ बीएनएस की कई धाराओं में केस दर्ज किया। इनमें चुनाव से जुड़े कथित भ्रामक बयान और धोखाधड़ी जैसे आरोप शामिल हैं। गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए उन्होंने 7 अप्रैल को तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया और हैदराबाद स्थित अपने पते के आधार पर अग्रिम राहत की मांग की।
इसी बीच, असम पुलिस जांच के सिलसिले में उनके दिल्ली स्थित आवास पर भी पहुंची, लेकिन उस समय वे वहां मौजूद नहीं थे। इसके बाद यह मामला कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ सियासी बहस का भी बड़ा मुद्दा बन गया है।
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