आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन से जुड़े एक प्रमुख सदस्य सज्जाद अहमद की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। वह जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के पट्टन क्षेत्र के पलहालन गांव का रहने वाला था। जानकारी के अनुसार, उसकी मृत्यु पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई। बताया जाता है कि वह वर्ष 1997 में हथियारों का प्रशिक्षण लेने पाकिस्तान गया था और तब से वहीं रहकर सक्रिय था। उस पर जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप थे।
इस घटना से पहले भी इसी तरह की एक वारदात सामने आई थी, जब लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक वरिष्ठ कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी की खैबर पख्तूनख्वा में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। दोनों घटनाओं के बीच करीब एक सप्ताह का अंतर बताया जा रहा है।
अन्य घटनाएं भी आईं सामने
सूत्रों के अनुसार, 26 अप्रैल 2026 को लांडी कोटाल इलाके में शेख यूसुफ अफरीदी को निशाना बनाकर हमला किया गया था, जिसमें उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसी क्रम में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक अन्य आतंकी अबू सखर मकसूद अहमद की मौत की भी खबर सामने आई। बताया जाता है कि उसका अंतिम संस्कार पाकिस्तान के फैसलाबाद के एक इलाके में किया गया।
पाकिस्तान में सक्रियता पर उठे सवाल
हाल की इन घटनाओं ने एक बार फिर पाकिस्तान में आतंकी संगठनों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत पहले भी कई मंचों पर यह आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए किया जाता है।
फिलहाल, इन घटनाओं को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन लगातार हो रही ऐसी घटनाएं क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताओं को जन्म दे रही हैं।
आतंकी गतिविधियों में भूमिका
जानकारी के अनुसार, सज्जाद अहमद पर जम्मू-कश्मीर समेत देश के अन्य हिस्सों में हिंसक गतिविधियों की साजिश रचने और उन्हें संचालित करने में शामिल होने के आरोप थे। वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में था और संगठन के भीतर उसे एक अहम सदस्य के रूप में देखा जाता था।
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