लखनऊ: मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज में माघ मेला के स्नान पर्व के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शोभायात्रा पर रोक के बाद उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है। माघ मेला प्राधिकरण की ओर से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद उन्होंने अपने नाम से पहले “शंकराचार्य” क्यों लगाया।
मेला प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस में यह भी बताया गया है कि इस मामले से जुड़ी सिविल अपील अभी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और अब तक इस पर कोई आदेश पारित नहीं हुआ है। ऐसे में कोई भी धर्माचार्य खुद को ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं कर सकता।
योगी सरकार पर अखिलेश यादव का तंज
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा के कथित महाभ्रष्ट राज में मेले के नाम पर हजारों-लाखों रुपये कमीशन के रूप में गटकने का नया खेल शुरू हो गया है। इसी वजह से साधु-संतों को सम्मान नहीं मिल पा रहा है, जो मेले की शोभा होते हैं।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि जिन संतों का दर्शन मात्र ही आशीर्वाद माना जाता है, उनके साथ शासन-प्रशासन द्वारा आपत्तिजनक और अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेला क्षेत्र में जो भी अव्यवस्था और बदइंतजामी पर सवाल उठाएगा, उसे निशाना बनाया जाएगा। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को कमिश्नर की जगह “कमीशनर” का नया पद बना देना चाहिए।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का बयान
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ जो दुर्व्यवहार किया गया है, उससे सभी दुखी हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद से शंकराचार्य अनशन पर बैठे हैं, लेकिन सरकार पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है।
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने शंकराचार्य के खिलाफ पूरी ट्रोल आर्मी उतार दी है, क्योंकि वे सत्ता के सामने नतमस्तक नहीं होते। उन्होंने कहा कि संत के आगे राजा नतमस्तक होता है, न कि संत राजा के आगे। उन्होंने इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।
तीन दिनों से धरने पर बैठे हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने साथ हुए कथित अपमान और शिष्यों के साथ पुलिस की अभद्रता के विरोध में पिछले तीन दिनों से मेला प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठे हैं।
वहीं, मौनी अमावस्या के महास्नान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा डुबकी न लगाने के विवाद को लेकर सोमवार को सौम्या अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि उन्हें स्नान करने से रोका नहीं गया था, बल्कि उनसे अनुरोध किया गया था।
उन्होंने बताया कि आपत्ति केवल पहिया लगी पालकी को लेकर थी, जिस पर सवार होकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद संगम नोज तक जाना चाहते थे। उस समय माघ अमावस्या के कारण संगम नोज पर स्नानार्थियों की भारी भीड़ थी। ऐसे में यदि पहिया लगी पालकी के साथ घाट तक जाया जाता, तो भगदड़ या किसी अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।
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