आज से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है। दिसंबर महीने की पहली तारीख को शीतकालीन सत्र का पहला दिन है, जो 19 दिसंबर तक चलेगा। इस सत्र के दौरान कई अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। सत्र शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने कहा, “मेरा सभी दलों से आग्रह है कि शीतकालीन सत्र पराजय की बौखलाहट का मैदान नहीं बनना चाहिए और यह सत्र विजय के अहंकार में भी परिवर्तित नहीं होना चाहिए।”
पीएम मोदी ने कहा, “कुछ समय से हमारी संसद या तो चुनावों की तैयारी का मंच बन गई है या फिर चुनावी हार के बाद की हताशा निकालने का जरिया। मैंने देखा है कि कुछ राज्यों में लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद नेताओं को इतनी ज़बरदस्त एंटी-इनकंबेंसी का सामना करना पड़ रहा है कि वे जनता के बीच जाने से कतराते हैं। इसके बजाय वे यहाँ आते हैं और सदन के भीतर अपनी सारी नाराज़गी उड़ेल देते हैं। कुछ राजनीतिक दलों ने संसद को अपनी राज्य-स्तरीय राजनीति का मंच बना दिया है, जो एक ऐसी अस्वस्थ परंपरा है जो राष्ट्र के हित में नहीं है।”
पीएम मोदी ने आगे अपील करते हुए कहा, “राजनीति में नकारात्मकता की कुछ उपयोगिता हो सकती है, लेकिन अंततः राष्ट्र निर्माण के लिए सकारात्मक सोच आवश्यक होती है। आइए, नकारात्मकता को सीमित रखें और अपना ध्यान राष्ट्र निर्माण पर केंद्रित करें।”
कांग्रेस ने कही ये बात
संसद के शीतकालीन सत्र को लेकर कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा, “शीतकालीन सत्र में सबसे बड़ा मुद्दा वोट का है। जिस तरीके से वोटों की हेराफेरी करके सरकार बनाई जाती है, उस पर लगातार चर्चा जारी रहेगी। उस पर चुनाव आयोग जवाबदेह नहीं है। जवाब उन्हें (सरकार) देना है, लेकिन वे जवाब हमसे मांग रहे हैं, यह दुख की बात है।”
सपा ने कहा
समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने संसद के शीतकालीन सत्र पर कहा, “मैं केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से कहना चाहूंगा कि मैंने स्वयं आज स्थगन प्रस्ताव दिया है, वह चर्चा करा लें। उनकी कथनी और करनी में फर्क नहीं होना चाहिए। हम तो चाहते हैं कि चर्चा हो और देश के सामने सच आए। मैं सदन में 646 पेज दिखाकर पूछूं कि ये नाम कहां से गायब हो गए? किसने नाम हटा
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