ज़्यादातर भारतीय घरों में गेहूं के आटे की रोटी रोज़ाना खाई जाती है और खासकर उत्तर भारत में यह खाने का बहुत ही ज़रूरी हिस्सा माना जाता है। यह बात सही है कि गेहूं पौष्टिक गुणों से भरा होता है, लेकिन आजकल बाज़ार में मिलने वाले गेहूं में एक ख़ास प्रोटीन होता है, जिसे ‘ग्लूटेन’ कहते हैं। कई सारे लोगों को इस ग्लूटेन से बनी चीज़ों को ठीक से पचाने में काफी परेशानी होती है। डॉक्टर बताते हैं कि पहले के समय में जो गेहूं आते थे, वे छिलके के साथ आते थे, लेकिन अब बाज़ार में ज़्यादातर जो गेहूं मिलते हैं, उन्हें जेनेटिकली मॉडिफाइड (बदला हुआ) किया गया है। इसलिए, अगर आप 21 दिनों तक गेहूं की रोटी नहीं खाते हैं, तो आपके शरीर को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं। यह एक तरह का साधारण प्रयोग हो सकता है जो सेहत के लिए अच्छा है।
वजन कम करने में मिलती है मदद
गेहूं की रोटी को अपने खाने से हटाने और उसकी जगह कम कैलोरी वाले या साबुत अनाज जैसे बाजरा, ज्वार, या रागी को खाने में शामिल करने से आपके शरीर में जाने वाली कुल कैलोरी की मात्रा कम हो सकती है। अगर आप कम कैलोरी लेंगे तो यह सीधी-सीधी बात है कि वजन घटाने में मदद मिलेगी। 21 दिनों के इस प्रयोग में यह पहला ऐसा फायदा है, जो सबसे पहले दिखना शुरू हो सकता है।
पाचन तंत्र को मिलेगा आराम
कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें गेहूं में मौजूद ग्लूटेन की वजह से पेट में गैस बनना, पेट फूलना (ब्लोटिंग होना), अपच होना या फिर कब्ज जैसी पेट से जुड़ी समस्याएँ होने लगती हैं। अगर आप 21 दिन तक गेहूं की रोटी नहीं खाते हैं, तो इन सारी समस्याओं में बहुत ज़्यादा कमी आ सकती है। इससे आपके पाचन तंत्र को कुछ समय के लिए आराम मिलता है और आपका पेट ज़्यादा सेहतमंद महसूस कर सकता है।
ब्लड शुगर लेवल पर नियंत्रण
गेहूं में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा काफी ज़्यादा होती है, और यह मात्रा आपके खून में शर्करा (ब्लड शुगर) के स्तर को तेज़ी से बढ़ा सकती है। अगर आप गेहूं को अपने खाने से हटा देते हैं, तो इससे ब्लड शुगर का स्तर स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। खास करके, जो लोग मधुमेह (डायबिटीज) के रोगी हैं, उनके लिए यह बदलाव बहुत ही अच्छा साबित हो सकता है और उनकी सेहत में सुधार ला सकता है।
सूजन और एलर्जी में कमी
कुछ लोगों में यह देखा गया है कि गेहूं का सेवन करने से उनके शरीर में सूजन (इंफ्लेमेशन) या एलर्जी की समस्या शुरू हो सकती है। अगर आप गेहूं खाना छोड़ देते हैं, तो जोड़ों में होने वाले दर्द या त्वचा से जुड़ी समस्याएँ जैसे मुंहासे (एक्ने) में कमी आ सकती है, क्योंकि ऐसा करने से शरीर के अंदर की सूजन धीरे-धीरे कम होने लगती है। यह एक साधारण तरीका है जिससे शरीर की अंदरूनी सेहत बेहतर हो सकती है।
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