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अक्टूबर 2025 प्रदोष व्रत: शनि प्रदोष और धनतेरस का शुभ संयोग, जानें तिथि, मुहूर्त और महत्व

अक्टूबर 2025 में दो प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं। 4 अक्टूबर को शनि प्रदोष और 18 अक्टूबर को धनतेरस संग प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग बनेगा। जानें तिथि, मुहूर्त और शनि दोष से बचने के उपाय।

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अक्टूबर 2025 का महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। इस महीने में कुल दो प्रदोष व्रत पड़ेंगे। पहला व्रत 4 अक्टूबर को और दूसरा व्रत 18 अक्टूबर को आएगा। खास बात यह है कि दोनों ही प्रदोष व्रत शनिवार को हैं, इसलिए ये शनि प्रदोष व्रत कहलाएंगे। शनि प्रदोष व्रत को शिवजी और शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त करने वाला माना जाता है। इतना ही नहीं, इस बार भक्तों को शनिदेव की कृपा से साढ़ेसाती और ढैय्या के दुष्प्रभावों से बचने का भी सुनहरा अवसर मिलेगा।

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पहला प्रदोष व्रत

अक्टूबर महीने का पहला प्रदोष व्रत शनिवार, 4 अक्टूबर को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार इस दिन त्रयोदशी तिथि 4 अक्टूबर को शाम 5:10 बजे से आरंभ होगी और 5 अक्टूबर को शाम 3:04 बजे तक रहेगी।

पूजा का शुभ समय: शाम 6:10 से 7:45 बजे तक।

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इस दिन भगवान शिव और शनिदेव की संयुक्त पूजा का विशेष महत्व है।

शिवलिंग पर दूध और जल से अभिषेक करें, पीपल के वृक्ष को जल चढ़ाएं और दीपक जलाकर प्रदोष का विधान पूर्ण करें।

दूसरा प्रदोष व्रत

अक्टूबर का दूसरा प्रदोष व्रत 18 अक्टूबर को होगा। यह दिन और भी खास है क्योंकि इस दिन धनतेरस भी पड़ रही है। यानी, इस संयोग से भक्तों को एक ही दिन प्रदोष और धनतेरस व्रत का फल प्राप्त होगा।

त्रयोदशी तिथि आरंभ: 18 अक्टूबर दोपहर 12:20 बजे।

समाप्ति: 19 अक्टूबर शाम 5:50 बजे तक।

पूजा का शुभ समय: शाम 5:50 से 7:40 बजे तक।

इस दिन प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव, शनिदेव और धन्वंतरि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

शनि प्रदोष व्रत पर विशेष उपाय

शास्त्रों के अनुसार शनि प्रदोष व्रत पर कुछ खास उपाय करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के दुष्प्रभाव कम होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

  1. महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हुए शिवलिंग पर दूध और जल से अभिषेक करें।
  2. पीपल के पेड़ को जल अर्पित करें, काले तिल चढ़ाएं और तिल का दीप जलाकर दिखाएं।
  3. शाम के समय घर की छत या बाहर एक दीपक अवश्य रखें।
  4. भगवान शिव की विधिवत पूजा करें और शिव चालीसा तथा शनि स्तोत्र का पाठ करें।
  5. जरूरतमंद लोगों को भोजन और वस्त्र का दान दें।
  6. आटे में 108 बार “श्रीराम” लिखे हुए कागज़ की गोलियां बनाकर मछलियों को खिलाएं।
  7. हनुमान चालीसा का पाठ छह बार करें और हनुमानजी को सिंदूर का चोला अर्पित करें।

अक्टूबर 2025 में आने वाले दोनों प्रदोष व्रत न केवल शिव और शनिदेव की कृपा पाने का अवसर देंगे, बल्कि जीवन की परेशानियों से राहत और शनि दोष से मुक्ति का भी उत्तम समय हैं। विशेष रूप से 18 अक्टूबर का प्रदोष व्रत, जब धनतेरस भी साथ पड़ रहा है, अति शुभ और दुर्लभ संयोग है।

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