नई दिल्ली में उन्नाव रेप केस से जुड़े कुलदीप सिंह सेंगर की मुख्य अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा है कि वह इस अपील पर 2 महीने के भीतर निर्णय सुनाए। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि हाईकोर्ट को समय पर फैसला देना संभव न लगे, तो वह सभी पक्षों को सुनकर सजा पर रोक संबंधी याचिका पर नया आदेश जारी कर सकता है।
सजा निलंबन के हाईकोर्ट आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
सीबीआई ने कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबन के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने पिछले साल दिसंबर में दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें उनकी सजा को निलंबित किया गया था।
सेंगर केस में हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे जारी
सीबीआई ने कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित करने के हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने पिछले साल दिसंबर में दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें उनकी सजा को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था।
विधायक को लोक सेवक मानने पर अदालत में बहस
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा कि क्या किसी विधायक को लोक सेवक माना जा सकता है। इस पर पक्षकार ने कहा कि केवल इस आधार पर हिरासत में लेना उचित नहीं होगा कि वह एक लोक सेवक हैं। जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि असल सवाल यही है कि क्या विधायक को लोक सेवक की श्रेणी में रखा जा सकता है, जिस पर कानूनी रूप से विचार किया जाना जरूरी है।
2017 का उन्नाव रेप केस, पूर्व विधायक सेंगर मुख्य आरोपी
उन्नाव रेप मामला साल 2017 का एक गंभीर आपराधिक केस है, जो उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में नाबालिग लड़की के साथ हुए कथित गैंगरेप से जुड़ा है। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को मुख्य आरोपी बताया गया है।
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