राज्य सभा के नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख आज है, लेकिन शिवसेना (शिंदे गुट) की ओर से अब तक आधिकारिक उम्मीदवार की घोषणा नहीं हो पाई है। खबरों के अनुसार एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना, शरद पवार के विरुद्ध अपना प्रत्याशी उतारने की रणनीति बना रही है। अगर ऐसा होता है, तो राज्य सभा चुनावों का मुकाबला बेहद रोचक हो सकता है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि शिंदे गुट मिलकर दो उम्मीदवार खड़े कर पवार के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है, जिसमें एक ज्योति वाघमारे भी है। आइए जानते है ज्योति वाघमारे के बारे में।
ज्योति वाघमारे का जीवन
डॉ. ज्योति वाघमारे का सामाजिक जुड़ाव उनके घर के माहौल से ही शुरू हुआ। उनके पिता नागनाथ वाघमारे दलित पैंथर आंदोलन से जुड़े थे। परिवार को संभालने के लिए उन्होंने वेटर और दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम किया, तमाम आर्थिक मुश्किलों के बावजूद कभी हार नहीं मानी। यही संघर्ष और माहौल डॉ. वाघमारे को सामाजिक मुद्दों के लिए संवेदनशील बनाता गया। उन्होंने अपने सामाजिक जीवन की शुरुआत मानवाधिकार अभियान, विद्रोही सांस्कृतिक आंदोलन और आंबेडकरी आंदोलन से की। सामाजिक जागरूकता के लिए महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, छत्रपति शिवाजी महाराज और महात्मा बसवेश्वर के विचारों पर खुलकर व्याख्यान दिए। कुछ वक्त उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में भी बिताया, फिर वालचंद महाविद्यालय में प्राध्यापिका बनकर पढ़ाया।
शैक्षणिक उपलब्धियां और बहुभाषी व्यक्तित्व
प्रोफेसर डॉ. ज्योति वाघमारे का शैक्षणिक सफर लोगों को सचमुच प्रेरित करता है। उन्होंने अंग्रेज़ी साहित्य में पीएचडी हासिल की और शिक्षा के क्षेत्र में सालों तक काम किया है। पढ़ाई के दिनों में भी वे हमेशा आगे रहीं, दसवीं में 84% अंक लाए, बारहवीं में पुणे मंडल के पिछड़े वर्ग में टॉप किया। अर्धमागधी विषय में भी उन्होंने राज्य स्तर पर पहला स्थान पाया। महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर उनके शोध को भी राज्य स्तर पर पहला पुरस्कार मिला। डॉ. वाघमारे को पढ़ाने का अनुभव दस साल से भी ज्यादा है और उन्होंने प्राध्यापिका के तौर पर कई छात्रों का मार्गदर्शन किया है। उनकी एक खासियत ये भी है कि वे पांच भाषाएं, मराठी, हिंदी, अंग्रेज़ी, तेलुगु और कन्नड़, अच्छे से बोल लेती हैं। इसी वजह से वो अलग-अलग जगहों के लोगों से आसानी से जुड़ जाती हैं।
राजनीति में सक्रियता और शिवसेना में भूमिका
सोलापुर जिले से आने वाली डॉ. ज्योति वाघमारे पिछले पंद्रह सालों से सामाजिक और राजनीतिक हलकों में दिखती रही हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में लोग उन्हें तेज-तर्रार और साफगोई से बोलने वाली नेता के तौर पर पहचानते हैं। अप्रैल 2023 में जब शिवसेना में बड़ा बदलाव हुआ, तो उन्होंने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व को अपनाया और पार्टी से जुड़ गईं। उनकी मेहनत और बेबाक अंदाज को देखकर पार्टी ने उन्हें राज्य प्रवक्ता और धाराशिव जिले की संपर्क प्रमुख की जिम्मेदारी दे दी। टीवी डिबेट्स और सार्वजनिक मंचों पर उन्होंने पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा। उनकी समझदारी और तर्कशक्ति ने उन्हें जल्दी ही पार्टी की अहम आवाज़ बना दिया।
आक्रामक वक्तृत्व और राजनीतिक पहचान
लोग डॉ. ज्योति वाघमारे को एक पढ़ी-लिखी, आक्रामक वक्ता के रूप में भी जानते हैं। शिवसेना के मशहूर दसरा मेळावा में उनके भाषणों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। अपने भाषणों में वे महाराष्ट्र के इतिहास, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचार, संविधान और मौजूदा राजनीति पर खुलकर बोलती हैं। राजनीतिक बहसों में वे विरोधियों को सीधा और तीखा जवाब देती हैं। बीते कुछ सालों में उन्होंने ठाकरे गुट के नेताओं की जमकर आलोचना की और पार्टी की लाइन को मजबूती से रखा। दलित परिवार से आने वाली, पढ़ी-लिखी और सामाजिक आंदोलनों से जुड़ी वाघमारे को अब महाराष्ट्र की राजनीति में एक उभरता हुआ चेहरा माना जा रहा है।
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