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ट्रंप को ‘नोबेल पीस प्राइज’ नहीं मिलने पर ‘वाइट हाउस’ से आया बयान,कहा- “शांति के बजाए राजनीति को तवज्जो”

डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने से व्हाइट हाउस में नाराज़गी, प्रशासन ने नॉर्वेजियन समिति पर राजनीति से प्रेरित निर्णय का आरोप लगाया, जबकि पुरस्कार मारिया कोरिना को मिला।

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वॉशिंगटन में शुक्रवार को नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा के बाद व्हाइट हाउस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि नॉर्वे की नोबेल समिति ने “वैश्विक शांति” के बजाय “राजनीतिक विचारों” को प्राथमिकता दी। ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा, “यह स्पष्ट है कि नोबेल समिति अब निष्पक्ष नहीं रही। उसने यह दिखा दिया कि उसे शांति की तुलना में राजनीति ज़्यादा प्रिय है।” ट्रंप समर्थकों का मानना था कि उनके नेतृत्व में पश्चिम एशिया में कई देशों के बीच समझौते और कूटनीतिक संबंधों में सुधार हुए हैं, इसलिए वे इस सम्मान के हकदार थे। सोशल मीडिया पर भी ट्रंप के समर्थकों ने लंबे समय से उनके पक्ष में अभियान चलाया था, लेकिन जब नाम घोषित हुआ, तो यह सपना अधूरा रह गया।

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मारिया मशादो को मिला सम्मान

नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने इस बार का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मशादो को देने की घोषणा की। मशादो को यह पुरस्कार देश में लोकतांत्रिक अधिकारों और न्यायपूर्ण शासन व्यवस्था के लिए उनके निरंतर संघर्ष के सम्मान में दिया गया है। समिति के मुताबिक, मशादो ने “तानाशाही के विरोध में और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए असाधारण साहस दिखाया है।” इस पुरस्कार के साथ उन्हें 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (करीब 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की राशि भी दी जाएगी। यह सम्मान न केवल मशादो की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि वेनेजुएला में लोकतंत्र की दिशा में चल रही लंबी लड़ाई को भी नई ऊर्जा देता है।

ट्रंप और नोबेल विवाद का नया अध्याय

डोनाल्ड ट्रंप का नाम नोबेल पुरस्कार से पहले भी कई बार जुड़ चुका है। उनके समर्थकों ने दावा किया था कि ट्रंप ने मध्य पूर्व में शांति समझौते, उत्तर कोरिया के साथ बातचीत और अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की वापसी जैसी पहल कर वैश्विक शांति की दिशा में अहम योगदान दिया। लेकिन आलोचकों का कहना है कि ट्रंप की नीतियां अक्सर विभाजन और टकराव को बढ़ावा देती रहीं। इस बार जब पुरस्कार मशादो को मिला, तो ट्रंप समर्थकों में निराशा और आक्रोश दोनों देखने को मिला। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिक्रिया केवल सम्मान से वंचित होने की नहीं, बल्कि अमेरिका की बदलती वैश्विक भूमिका को लेकर असुरक्षा की भी झलक है।

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लोकतंत्र बनाम राजनीति की बहस

नोबेल समिति के निर्णय के बाद वैश्विक स्तर पर बहस शुरू हो गई है, क्या नोबेल पुरस्कार अब भी अपनी पारंपरिक निष्पक्षता और आदर्शों को बनाए रखे हुए है? जहां एक ओर मशादो को मिला यह सम्मान लोकतंत्र समर्थकों के लिए प्रेरणा बना है, वहीं दूसरी ओर व्हाइट हाउस की तीखी प्रतिक्रिया ने पुरस्कार की साख पर सवाल उठा दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि मशादो का चयन ऐसे समय में हुआ है जब कई देशों में लोकतांत्रिक मूल्यों पर खतरा मंडरा रहा है। इसलिए यह निर्णय राजनीतिक नहीं, बल्कि एक मजबूत संदेश है, कि दुनिया अब भी स्वतंत्रता और न्याय के लिए संघर्ष करने वालों के साथ खड़ी है।

Keywords: Nobel Peace Prize 2025, White House Reaction, Nobel Committee Controversy, Global Peace Award

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