बांग्लादेश में मंगलवार को एक ऐतिहासिक दिन था, जब तारिक रहमान ने देश के 11वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। वह बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP) के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। आम चुनावों में शानदार जीत के बाद, वह अब अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद युनूस की जगह प्रधानमंत्री पद का कार्यभार संभालेंगे।
यह शपथ ग्रहण समारोह ढाका स्थित संसद भवन के साउथ प्लाजा में हुआ, जहां राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने उन्हें शपथ दिलाई। इस अवसर पर, उनके साथ नई सरकार के अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली, जिनमें डॉ. खलीलुर रहमान (विदेश मंत्री), सलाहुद्दीन अहमद (गृहमंत्री), डॉ. अमीर खसरू महमूद (वित्त और योजना मंत्री), और शमा ओबैद (विदेश राज्य मंत्री) शामिल हैं।
इस महत्वपूर्ण समारोह में भारत के लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और विदेश सचिव विक्रम मिस्री समेत कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। समारोह में मलेशिया के प्रधानमंत्री, पाकिस्तान, मालदीव, तुर्की, श्रीलंका के दूतावासों के अधिकारी भी उपस्थित थे, और चीन, सऊदी अरब, यूएई और ब्रुनेई को भी आमंत्रण भेजा गया था।
The Indian Air force special aircraft carrying the Indian delegation led by Lok Sabha Speaker @ombirlakota landed at the #Bangladesh Air force airbase at Dhaka to attend Tarique Rahman oath taking ceremony.
— SansadTV (@sansad_tv) February 17, 2026
Bangladesh Ministry of Foreign Affairs Secretary Dr Md. Nazrul Islam,… pic.twitter.com/HBGBIxmgHC
बांग्लादेश की नई सरकार के कैबिनेट मंत्रियों की सूची ये नेता थे शामिल
बांग्लादेश की नई सरकार में कई प्रमुख नेता और मंत्री शामिल हैं। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व में गठित कैबिनेट में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, अमीर खोशरू महमूद चौधरी, सलाहुद्दीन अहमद, इकबाल हसन महमूद, मेजर (रिटायर्ड) हाफिज उद्दीन अहमद बीर बिक्रम, अबू जफर मोहम्मद जाहिद हुसैन, डॉ. खलीलुर रहमान और अब्दुल अव्वल मिंटू जैसे प्रमुख नेता शामिल हैं।
इसके अलावा काजी शाह मोफज्जल हुसैन कैकोबाद, मिजानुर रहमान मीनू, निताई रॉय चौधरी (हिंदू नेता), खंडेकर अब्दुल मुक्तदिर, अरिफुल हक चौधरी, जहीर उद्दीन स्वपन, मोहम्मद अमीन उर रशीद, अफरोजा खानम रीटा, शाहिद उद्दीन चौधरी एनी, असदुल हबीब दुलु, मोहम्मद असदुज्जमां, जकारिया ताहिर, दीपेन दीवान (अल्पसंख्यक), एएनएम एहसानुल हक मिलन, सरदार मोहम्मद सखावत हुसैन, फकीर महबूब अनम, और शेख रबीउल आलम जैसे कई अन्य दिग्गज भी मंत्रिमंडल का हिस्सा बने हैं।
बांग्लादेश के नए राज्य मंत्रियों की लिस्ट
बांग्लादेश के नए मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री के तौर पर कई प्रमुख नेताओं की नियुक्ति की गई है। इनमें एम रशीदुज्जमां मिल्लत, अनिंद्य इस्लाम अमित, एमडी शरीफुल आलम, शमा ओबैद इस्लाम, सुल्तान सलाहुद्दीन टुकू, बैरिस्टर कैसर कमाल, फरहाद हुसैन आजाद और एमडी अमीनुल हक (टेक्नोक्रेट) जैसे दिग्गज नेता शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त मीर मोहम्मद हेलाल उद्दीन, हबीबुर रशीद, एमडी राजीब अहसन, एमडी अब्दुल बारी, मीर शाहे आलम, जोनायद अब्दुर रहीम साकी, इशराक़ हुसैन, फरजाना शर्मिन, शेख फ़रीदुल इस्लाम, नुरुल हक नूर, यासर खान चौधरी, एम इकबाल हुसैन, एमए मुहिथ, अहमद सोहेल मंजूर, बॉबी हज्जाज और अली नेवाज महमूद खैयाम जैसे अन्य नाम भी राज्य मंत्री पदों पर नियुक्त किए गए हैं।
तारिक रहमान को बीएनपी संसदीय दल का नया नेता नियुक्त किया गया
बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) ने शपथ ग्रहण समारोह से पहले एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें तारिक रहमान को संसदीय दल का नेता चुना गया। यह बैठक सुबह 11:30 बजे बुलाई गई थी और इसमें औपचारिकता के तौर पर तारिक रहमान के नेतृत्व की मंजूरी दी गई। इसके बाद, तारिक रहमान ने विपक्षी दलों के नेताओं से भी मुलाकात की, जिनमें जमात ए इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान और नेशनल सिटीजन पार्टी के संयोजक नाहिद इस्लाम शामिल थे।
बीएनपी की शानदार जीत
हाल ही में बांग्लादेश में हुए चुनाव में बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) ने जबरदस्त जीत हासिल की। बीएनपी ने 297 में से 209 सीटें जीतकर सरकार बनाने की स्थिति में आ गई। इस जीत के साथ ही पार्टी ने देश की राजनीतिक दिशा को नया मोड़ दिया। वहीं, दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटों पर कब्जा किया, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग को चुनाव में भाग लेने से रोक दिया गया।
तारिक रहमान की संघर्ष यात्रा
तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर 1965 को ढाका में हुआ। वह बांग्लादेश के पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जिया-उर-रहमान के पुत्र हैं। 36 साल के लंबे इंतजार के बाद, वह बांग्लादेश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री बने। अपने राजनीतिक सफर में, उन्होंने 17 साल का निर्वासन झेला, साथ ही जेल, यातनाएं और राजनीतिक षड्यंत्रों का सामना किया। इस दौरान उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर समस्या भी हुई। तारिक रहमान 1990 से राजनीति में सक्रिय हैं और 1991 में अपनी मां को प्रधानमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाई। शेख हसीना के शासनकाल में उन्हें एक मामले में मौत की सजा भी सुनाई गई, लेकिन निर्वासन के कारण वह बांग्लादेश वापस नहीं लौटे। 2024 में शेख हसीना के खिलाफ छात्र आंदोलन के बाद उन्होंने स्वदेश लौटने का फैसला किया।
अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में उनके खिलाफ चल रहे मामले रद्द किए गए, जिससे उन्हें राहत मिली। दिसंबर 2025 में उन्होंने लंदन से बांग्लादेश लौटने की घोषणा की। जब वह ढाका वापस लौटे, तो उनकी मां का निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने चुनावी मैदान में उतरकर ढाका-17 और बोगरा-6 सीटों से चुनाव लड़ा, और दोनों स्थानों से जीत हासिल की।
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