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तालिबान का नया फरमान: लड़कियां स्कूल नहीं, सिर्फ मदरसे जाएं, परिवारों पर दबाव और बहिष्कार की धमकी

तालिबान ने अफगानिस्तान में लड़कियों की स्कूल-कॉलेज पढ़ाई पर पूरी रोक लगाई, परिवारों पर मदरसों में भेजने का दबाव, सामाजिक बहिष्कार की धमकी।

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अफगानिस्तान में तालिबान ने लड़कियों की शिक्षा पर और सख्त नियम लागू किए। स्कूलों और कॉलेजों में लड़कियों की पढ़ाई पर पूरी तरह रोक लगा दी गई। अब परिवारों पर दबाव है कि वे अपनी बेटियों को सिर्फ मदरसों में भेजें। जो परिवार इस नियम को नहीं मानते, उन्हें सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह नया फरमान लड़कियों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा रहा है।

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स्कूल छूटे, सपने टूटे

2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद लाखों लड़कियों की पढ़ाई रुक गई। हेरात शहर की 24 साल की फरहीन अर्थशास्त्र पढ़ रही थीं। वह प्रोफेसर बनना चाहती थीं। लेकिन तालिबान के नियमों ने उनकी पढ़ाई छीन ली। अब वह हर सुबह मस्जिद के तहखाने में बने मदरसे में जाती हैं। वहां वह 60 अन्य लड़कियों के साथ कुरान पढ़ती हैं। फरहीन कहती हैं कि उनके पास कोई और रास्ता नहीं है। मदरसे में जाने से उनके परिवार को हर महीने 1,200 अफगानी (1,536 रुपये) मिलते हैं, जो उनके लिए जरूरी है।

मदरसों का बढ़ता नेटवर्क

तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान में मदरसों का बड़ा जाल बिछाया है। पिछले साल तक देश में 21,000 से ज्यादा मदरसे बन चुके थे। सितंबर 2024 से फरवरी 2025 तक 11 प्रांतों में 50 नए मदरसे खोले गए। ये मदरसे मस्जिदों या मौलवियों के घरों में चल रहे हैं। तालिबान का शिक्षा मंत्रालय इनके शिक्षकों को तनख्वाह देता है। मंत्रालय ने 21,300 पूर्व मदरसा छात्रों को शिक्षण प्रमाणपत्र दिए, ताकि वे हाई स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर पढ़ा सकें।

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परिवारों की मजबूरी

तालिबान के नियमों ने परिवारों को मुश्किल में डाल दिया है। प्राइमरी स्कूल के बाद लड़कियों के लिए कोई स्कूल नहीं बचा। निमरोज की रजिया बताती हैं कि स्थानीय मौलवी ने कहा कि उनकी बेटियां अगर मदरसे नहीं जाएंगी, तो कोई मदद नहीं मिलेगी। रजिया ने मजबूरी में अपनी दो बेटियों को स्कूल छोड़कर मदरसे भेजा। मौलवी ने खाने-पीने का सामान देने का वादा किया, लेकिन बाद में कुछ नहीं दिया। कई परिवारों को समाज से अलग कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने बेटियों को स्कूल भेजने की कोशिश की।

स्कूलों से गायब होते बच्चे

मदरसों पर जोर देने की वजह से स्कूल खाली हो रहे हैं। कंधार की शिक्षिका सारा कहती हैं कि उनकी कक्षा में पहले 40 बच्चे थे, अब 20-25 बचे हैं। इस साल उनकी 57 छात्राएं स्कूल छोड़ चुकी हैं। कुछ लड़कियां सुबह मदरसे जाती हैं और दोपहर को स्कूल, लेकिन मौलवियों का दबाव इतना बढ़ जाता है कि वे स्कूल छोड़ देती हैं।

सामाजिक ढांचे पर असर

तालिबान का कहना है कि उनकी नीतियां इस्लामी नियमों के हिसाब से हैं। लेकिन इनकी वजह से लड़कियों की शिक्षा खत्म हो रही है। जो परिवार इन नियमों को मानते हैं, उनकी बेटियां घर लौटकर माता-पिता को गलत ठहराने लगती हैं। तालिबान ऐसे परिवारों को नौकरी और आर्थिक मदद देता है, जो अपनी बेटियों को मदरसों में भेजते हैं। इससे सामाजिक ढांचा बदल रहा है, और कई परिवार मजबूरी में इन नियमों को मान रहे हैं।

Keywords:Taliban Education Ban, Girls Schooling, Afghanistan Madrasas, Women’s Rights, Social Pressure

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