इस समय दुनियाभर में स्मार्टफोन की लोकप्रियता किसी दीवानगी से कम नहीं। नए iPhone मॉडल के लॉन्च होते ही लोग स्टोर्स के बाहर लंबी कतारों में लग जाते हैं। लेकिन यह जुनून अब खतरनाक मोड़ ले चुका है। कई लोग महंगे गैजेट खरीदने के लिए अपनी सीमाएं पार कर रहे हैं, यहां तक कि शरीर के अंग बेचने तक को तैयार हैं। इस गंभीर रुझान को रोकने के लिए मलेशियाई सरकार ने ऑर्गन ट्रेडिंग पर सख्त कार्रवाई की घोषणा की है। अब कोई भी व्यक्ति अगर अपने शरीर का अंग बेचकर iPhone या किसी अन्य लग्जरी आइटम खरीदने की कोशिश करेगा, तो उसे 15 साल तक की कैद और लाखों रुपये का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। यह कदम उस आर्थिक असमानता की विकृत मानसिकता को रोकने के लिए उठाया गया है जो गरीब को शोषण की ओर धकेल रही थी।
सांसद के बयान से उठा विवाद
यह मामला 2023 में तब चर्चा में आया जब माचांग के सांसद वान अहमद फेयसाल वान अहमद कमाल ने संसद में कहा था कि “अगर कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) से अतिरिक्त निकासी की अनुमति नहीं दी गई, तो लोग किडनी तक बेचने को मजबूर हो जाएंगे।” इस बयान ने पूरे देश में हंगामा मचा दिया। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय (MOH) ने तुरंत इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि ऑर्गन बेचना अवैध और अनैतिक है। मंत्रालय ने साफ किया कि ऐसे मामलों में एंटी-ट्रैफिकिंग इन पर्सन्स एंड एंटी-स्मगलिंग ऑफ माइग्रेंट्स एक्ट 2007 (एक्ट 670) के तहत कार्रवाई होगी। इस एक्ट में 15 साल की जेल, 5 लाख से 10 लाख रुपये तक जुर्माना और लाभ की जब्ती का प्रावधान है। मंत्रालय का कहना है कि ऑर्गन ट्रैफिकिंग न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि यह मानवता के खिलाफ अपराध है।
ऑर्गन ट्रैफिकिंग पर मलेशिया का सख्त रुख
मलेशिया ने 2008 की इथंबुल घोषणा पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें ऑर्गन ट्रैफिकिंग और ट्रांसप्लांट टूरिज्म पर रोक लगाने की बात कही गई है। इस घोषणा के अनुसार, अंगों को बेचना किसी भी व्यक्ति के धर्म, जाति, लिंग या आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं किया जा सकता। 2023 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक ट्रांसप्लांट कमिटी गठित की, जो हर गैर-नागरिक या अनरिलेटेड डोनर के मामले की गहराई से जांच करती है। यह कमिटी चिकित्सकीय, मानसिक और सामाजिक पहलुओं पर विचार करती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी दान दबाव में नहीं किया जा रहा है। पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशक तान श्री डॉ. नूर हिशाम अब्दुल्लाह ने कहा था कि “ऑर्गन डोनेशन केवल उन्हीं मरीजों के लिए है जो गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। इसका इस्तेमाल व्यापार के रूप में करना घोर अपराध है।” उन्होंने नागरिकों से नैतिक डोनेशन को बढ़ावा देने की अपील की।
चेतावनी बन गया एक किशोर का दर्दनाक उदाहरण
यह मुद्दा तब और संवेदनशील हो गया जब चीन के 17 वर्षीय वांग शांगकुन की कहानी दुनिया के सामने आई। साल 2011 में उसने ब्लैक मार्केट में अपनी एक किडनी बेच दी ताकि iPhone 4 और iPad 2 खरीद सके। उसे मात्र 20,000 युआन (करीब 12,000 रिंगिट) मिले, लेकिन आज 31 साल की उम्र में वह स्थायी रूप से विकलांग है क्योंकि उसकी दूसरी किडनी फेल हो गई। वांग की यह कहानी दुनिया भर के युवाओं के लिए एक चेतावनी है, जो दिखावे और सोशल स्टेटस के लिए अपनी सेहत और जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। iPhone का क्रेज भले ही ट्रेंड बन गया हो, लेकिन मलेशिआई सरकार अब इस “खतरनाक स्टेटस सिंबल” को रोकने के लिए पूरी तरह गंभीर है।
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