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नेपाल में Gen-Z आंदोलन के बाद पहली बार सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली, इस मंच पर आये नजर

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली इस्तीफे के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। Gen-Z आंदोलन से हिली नेपाल की राजनीति में उनकी यह उपस्थिति सत्ता की ओर वापसी के संकेत मानी जा रही है।

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नेपाल की राजनीति हाल के हफ्तों में बड़े उथल-पुथल से गुज़री है। 8 सितंबर को भड़के Gen Z आंदोलन ने पूरे देश में हिंसा और असंतोष की लहर पैदा कर दी। सोशल मीडिया पर रोक, भ्रष्टाचार और राजनीतिक जवाबदेही की मांगों से शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे व्यापक विद्रोह का रूप लेता गया। छात्रों और युवाओं की अगुवाई वाले इस प्रदर्शन में अब तक 74 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिससे इसे 2006 के लोकतंत्र आंदोलन के बाद की सबसे बड़ी राजनीतिक हलचल कहा जा रहा है। इसी दबाव के चलते 9 सितंबर को तत्कालीन प्रधानमंत्री और CPN-UML के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद से वे सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह गायब रहे और सुरक्षा कारणों से अस्थायी आवास में सीमित हो गए।

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ओली की चुप्पी तोड़ने वाली पहली उपस्थिति

करीब तीन सप्ताह की चुप्पी के बाद ओली भक्तपुर में सार्वजनिक मंच पर दिखाई दिए। यह कार्यक्रम उनकी पार्टी के छात्र विंग “राष्ट्रिय युवा संघ” द्वारा आयोजित किया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं के कार्यक्रम में उनकी भागीदारी सिर्फ उपस्थिति भर नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि वे पार्टी के भीतर अपनी स्थिति मजबूत करने और खासकर नाराज़ युवा वर्ग से दोबारा जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान युवाओं ने ओली की नेतृत्व शैली की आलोचना की थी, ऐसे में यह रणनीति उनकी भविष्य की राजनीति के लिए अहम मानी जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह उपस्थिति CPN-UML के भीतर भी यह संदेश देने का प्रयास है कि ओली अभी भी प्रासंगिक और सक्रिय हैं।

सुशीला कार्की बानी अंतरिम प्रधानमंत्री

ओली के इस्तीफे के बाद नेपाल की बागडोर पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में सौंपी गई। हिंसा और प्रदर्शनों से जूझते देश को संभालना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। संसद भंग हो चुकी है और मार्च में नए आम चुनाव की घोषणा की गई है। ऐसे हालात में नेपाल संक्रमण काल से गुज़र रहा है, जहां स्थिरता की तलाश और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इस बीच, काठमांडू सहित कई शहरों में प्रदर्शन अब भी जारी हैं और Gen-Z आंदोलन के कार्यकर्ता राजनीतिक व्यवस्था पर दबाव बनाए हुए हैं।

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ओली की वापसी पर टिकी है भविष्य की राजनीति

ओली की यह सार्वजनिक उपस्थिति उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को स्पष्ट करती है। भले ही उन्हें प्रदर्शनकारियों के गुस्से का सामना करना पड़ा हो, लेकिन उनकी रणनीति यह दिखाती है कि वे अपने समर्थक आधार को फिर से मजबूत करना चाहते हैं। चुनावी माहौल में उनकी पार्टी CPN-UML के लिए उनका अनुभव और लोकप्रियता अहम भूमिका निभा सकती है। हालांकि, जनता का गुस्सा, युवाओं की बढ़ती सक्रियता और बदलते राजनीतिक समीकरण उनके लिए बड़ी चुनौती बने रहेंगे। आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि ओली की वापसी उन्हें सत्ता की ओर ले जाती है या यह केवल एक औपचारिक उपस्थिति भर थी। नेपाल की राजनीति फिलहाल अनिश्चितताओं से भरी हुई है और हर कदम भविष्य की तस्वीर को बदल सकता है।

KeywordsNepal Politics, Kp Sharma Oli, Gen Z Movement Nepal, Nepal Protests, Sushila Karki Interim Prime Minister, Nepal Parliament Dissolved, Nepal Elections 2025, Social Media Ban Nepal, Nepal Democracy Crisis

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