गाज़ा में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। दीर अल-बलाह और आसपास के इलाकों में इज़रायल के हवाई हमलों में एक ही रात में 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई। सबसे दर्दनाक घटना नुसेरात शरणार्थी शिविर में हुई, जहां एक ही परिवार के नौ सदस्य मारे गए। यह सब उस समय हुआ जब इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण देते हुए दोहराया कि उनका देश “हमास के खिलाफ अंतिम लड़ाई” लड़ रहा है। हालांकि, उनके भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधियों ने विरोध जताते हुए सभा का बहिष्कार किया। इसने यह स्पष्ट कर दिया कि दुनिया के कई हिस्सों में अब इज़रायल की आक्रामक नीति को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलेंगे नेतन्याहू
गाज़ा युद्धविराम को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। यूरोप और लैटिन अमेरिकी देशों सहित कई देशों ने हाल ही में फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी है, जिससे इज़रायल की स्थिति और असहज हो गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी विभिन्न देशों ने दबाव डाला है कि वे नेतन्याहू को युद्धविराम के लिए राजी करें। ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में संकेत दिया कि बंधक रिहाई और संघर्ष कम करने के लिए बातचीत आगे बढ़ रही है। सोमवार को उनकी नेतन्याहू से मुलाकात होने वाली है, जिसे लेकर उम्मीद और चिंता दोनों बनी हुई हैं। हालांकि, इज़रायल का सैन्य अभियान अब भी तेज है और ज़मीनी स्तर पर मानवीय संकट विकराल रूप ले चुका है।
65,000 से अधिक लोगों की गयी जान
तुर्फा और शती जैसे इलाकों में हालिया हमलों ने परिवारों को तबाह कर दिया। तुर्फा में 11 लोगों की मौत हुई, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे। गाज़ा के अस्पताल अब लगभग ढहने की कगार पर हैं। शिफा और अल-अहली अस्पतालों में शवों और घायलों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि दवाइयों और ईंधन की भारी कमी महसूस की जा रही है। डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने भी सुरक्षा कारणों से अपनी सेवाएं रोक दी हैं, क्योंकि इज़रायली टैंक उनके क्लीनिक के बेहद नजदीक पहुंच गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अब तक 65,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और डेढ़ लाख से अधिक घायल हैं। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की है।
हालात अकाल और महामारी की ओर बढ़ रहे
गाज़ा के हालात इस समय बेहद गंभीर हैं। लाखों लोग पलायन कर चुके हैं, लेकिन लगभग सात लाख लोग अब भी वहां फंसे हुए हैं क्योंकि उनके पास सुरक्षित जगहों तक पहुंचने के संसाधन नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का कहना है कि हालात अब अकाल और महामारी की ओर बढ़ रहे हैं। सवाल यह है कि क्या वैश्विक दबाव नेतन्याहू को युद्धविराम पर मजबूर कर पाएगा या फिर संघर्ष और लंबा खिंचेगा। गाज़ा के लोग अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनकी आवाज बनेगा और उन्हें युद्ध की विभीषिका से बाहर निकालने में मदद करेगा।
Keywords – Gaza Airstrikes, Israel Gaza Conflict, Benjamin Netanyahu Un Speech, Palestine Recognition, Ceasefire Pressure, Humanitarian Crisis Gaza, Donald Trump Netanyahu Meeting, Gaza Hospitals Collapse, Doctors Without Borders Gaza, Gaza Civilian Casualties, Un Response Gaza War

