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जापान को पहली बार महिला प्रधानमंत्री मिलने की तैयारी, साने ताकाइची बनीं एलडीपी की नई नेता

जापान की साने ताकाइची एलडीपी की नई नेता बनीं और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं। उन्हें बूढ़ती आबादी, आप्रवास और पार्टी की घटती लोकप्रियता जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करना है।

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जापान के राजनीतिक इतिहास में पहली बार ऐसा मौका आया है जब देश को महिला प्रधानमंत्री मिलने की संभावना बन गई है। सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) ने साने ताकाइची को अपना नया नेता चुना है। इस जीत के साथ ताकाइची अब देश की राजनीतिक कुर्सी की सबसे प्रबल दावेदार बन गई हैं। अगर संसद में मतदान के दौरान वे जीत हासिल करती हैं, तो वे जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री होंगी।

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ताकाइची ने एलडीपी के नेतृत्व चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री जुनिचिरो कोइजुमी के बेटे शिंजिरो कोइजुमी को मात दी। पहले दौर में किसी भी उम्मीदवार को बहुमत नहीं मिला था, लेकिन रन-ऑफ वोट में ताकाइची ने बढ़त हासिल की। 44 वर्षीय कोइजुमी हार के बावजूद युवा राजनीति का चेहरा बने हुए हैं, जबकि 64 वर्षीया ताकाइची अब जापान की नीतियों के केंद्र में आ चुकी हैं।

कैसे बढ़ीं साने ताकाइची की दावेदारी

साने ताकाइची का राजनीतिक सफर लंबा और प्रभावशाली रहा है। वे पहले भी कई बार सरकार में मंत्री रह चुकी हैं और उन्हें आर्थिक सुरक्षा मंत्री के रूप में भी जाना जाता है। पार्टी के दक्षिणपंथी धड़े से जुड़ी ताकाइची लंबे समय से पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की करीबी मानी जाती हैं। आबे की आर्थिक नीतियों, जिन्हें “आबेनॉमिक्स” कहा गया, की समर्थक ताकाइची ने भी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े वित्तीय व्यय और मौद्रिक ढील की बात की है। हालांकि चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने कुछ हद तक अपनी छवि को संतुलित करने की कोशिश की। चीन के प्रति उनके रुख में नरमी दिखी और उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर भी संवाद बढ़ाया। इन बदलावों ने उन्हें पार्टी के भीतर व्यापक समर्थन दिलाया।

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एलडीपी की सत्ता में गिरावट

लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) 1955 से अब तक लगभग लगातार सत्ता में रही है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पार्टी की लोकप्रियता में गिरावट देखी जा रही है। मतदाताओं के बीच असंतोष और नई पार्टियों का उभार एलडीपी के लिए चुनौती बन गया है। विशेष रूप से सानसेतो पार्टी जैसी नई ताकतें आप्रवासन विरोधी नारों के साथ लोगों का ध्यान खींच रही हैं। सानसेतो आप्रवास को “चुपचाप आक्रमण” कहती है और विदेशी कामगारों को कई सामाजिक समस्याओं के लिए जिम्मेदार बताती है। ऐसे माहौल में ताकाइची को पार्टी की छवि को फिर से मज़बूत करना और मतदाताओं का भरोसा जीतना होगा।

आबादी से जुड़ी मुश्किलें

जापान के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है तेजी से घटती जन्मदर और बूढ़ी होती आबादी। देश की अर्थव्यवस्था को बनाए रखने के लिए आप्रवासी कामगारों की जरूरत है, लेकिन समाज में उनके प्रति असहजता भी मौजूद है। ताकाइची ने नेता चुने जाने के बाद कहा कि, “जापान को उन नीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए जो पूरी तरह अलग संस्कृतियों और पृष्ठभूमि वाले लोगों को आने की अनुमति देती हैं।” उनका यह बयान आप्रवासन को लेकर कड़े रुख का संकेत देता है। वहीं उनके प्रतिद्वंदी शिंजिरो कोइजुमी ने कहा कि “विदेशियों की अवैध रोजगार और बढ़ती अपराध दर स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का विषय है।” जापान में विदेशियों की आबादी अभी सिर्फ 3 प्रतिशत है, लेकिन यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस के केंद्र में है।

विदेश नीति और आर्थिक दिशा

ताकाइची ने अपने शुरुआती बयानों में यह संकेत दिया है कि वे शिंजो आबे की नीतियों को आगे बढ़ाना चाहेंगी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से उनमें बदलाव भी करेंगी। उन्होंने चीन के साथ संबंधों में संतुलन की बात कही है, जो जापान की विदेश नीति के लिए अहम संकेत है। आर्थिक मोर्चे पर ताकाइची के सामने चुनौती है कि देश की मुद्रास्फीति और धीमी वृद्धि दर को कैसे संभाला जाए। उन्होंने कहा है कि जापान को तकनीकी नवाचार, छोटे व्यवसायों को बढ़ावा और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

आगे का रास्ता और उम्मीदें

अब सबकी निगाहें 15 अक्टूबर को होने वाले संसदीय मतदान पर टिकी हैं। एलडीपी संसद की सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए ताकाइची का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि हाल ही के चुनावों के बाद एलडीपी गठबंधन को दोनों सदनों में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, जिससे ताकाइची को विपक्ष के सहयोग की भी आवश्यकता होगी। उनके नेतृत्व में जापान महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। लेकिन यह भी सच है कि ताकाइची के सामने आर्थिक स्थिरता, सामाजिक एकता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बड़ी जिम्मेदारी है। यदि वे इन चुनौतियों को सफलतापूर्वक संभाल पाती हैं, तो वे न केवल जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री, बल्कि उसके भविष्य की दिशा तय करने वाली प्रमुख नेता साबित होंगी।

Keywords: Japan First Female Prime Minister, Sanae Takaichi, Liberal Democratic Party Japan, Japanese Politics, Aging Population Japan

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