आज के विज्ञान ने हमारी जिंदगी को बहुत आसान बना दिया है और हमारी रोजमर्रा की जरूरतों को भी समझना आसान कर दिया है। इसी कड़ी में चीन के वैज्ञानिकों ने एक नया टूल बनाया है जिसे ‘Artificial Tongue’ कहा जाता है। यह बिलकुल इंसानी जीभ की तरह काम करती है और खाने में मौजूद तीखापन तुरंत पहचान लेती है। खासकर यह मेजर करती है कि खाने में कितनी मात्रा में कैप्साइसिन है, यानी खाना कितना तीखा होगा। इससे खाने का स्वाद मापना तेज और आसान हो गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह नई तकनीक रसोई और खाद्य उद्योग दोनों में बहुत काम आएगी।
दूध से प्रेरित तकनीक
बता दें, वैज्ञानिकों ने इस नई तकनीक के लिए प्रेरणा दूध से ली। अक्सर जब खाना बहुत तीखा होता है, तो लोग राहत के लिए दूध पीते हैं क्योंकि इसमें मौजूद केसिन नामक प्रोटीन मिर्च के सक्रिय पदार्थ कैप्साइसिन को कम कर देता है। इसी विचार को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ‘Artificial Tongue’ बनाई। चीनी वैज्ञानिक वेजुन डेंग के अनुसार, इस टूल का डिज़ाइन केसिन की रासायनिक प्रतिक्रिया से प्रेरित है। जैसे ही यह तीखे एलिमेंट्स के संपर्क में आता है, यह तुरंत रिस्पांस करता है और भोजन में मौजूद तीखापन माप देता है। इस तरह खाना मापना अब तेज और आसान हो गया है।
कैसे काम करती है यह ‘Artificial Tongue’?
वैज्ञानिकों ने इस ‘Artificial Tongue’ को बनाने के लिए एक मिक्सचर तैयार किया, जिसमें एक्रिलिक एसिड, कोलीन क्लोराइड और स्किम्ड मिल्क पाउडर शामिल थे। इस मिश्रण को यूवी लाइट (UV Light) में रखकर एक पतली, पारदर्शी और लचीली फिल्म बनाई गई, जो बिजली धारा को चला सकती है। जैसे ही यह फिल्म मिर्च या किसी तीखे पदार्थ के संपर्क में आती है, इसमें इलेक्ट्रिक कर्रेंट बदल जाती है। यही बदलाव इस टूल को बताता है कि खाना कितना तीखा है। शोधकर्ताओं ने इसे आठ अलग तरह की मिर्चों और आठ तीखे व्यंजनों जैसे हॉट सॉस पर आजमाया। आपको जानके हैरानी होगी कि इसका परिणाम चौंकाने वाला थे, सिर्फ 10 सेकंड में ही धारा में परिवर्तन दर्ज हुआ, जिससे पता चला कि यह नकली जीभ तीखापन बहुत सटीक रूप से पहचान सकती है।
कैसे कर सकते है इसका उपयोग?
यह नई टेक्नोलॉजी सिर्फ फूड इंडस्ट्री में ही काम नहीं आएगी, बल्कि उन लोगों के लिए भी फायदेमंद होगी जिन्हें मिर्च या मसालों से परेशानी होती है, या जिनकी स्वाद पहचानने की क्षमता कम हो गई है। भविष्य में इसे रोबोटिक फूड टेस्टिंग, स्वाद सेंसर डिवाइस और स्वादहीनता जैसी बीमारियों के कारण में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस ‘नकली जीभ’ से विज्ञान ने एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया है, जहां सिर्फ तकनीकी काम नहीं हो रहे, बल्कि इंसानी अनुभव स्वाद, महसूस करना और स्वास्थ्य भी बेहतर बनाए जा रहे हैं। यह खोज स्वाद को समझने और मापने का नया रास्ता खोलती है।
Keywords: Artificial Tongue, China Scientists, Artificial Taste Sensor, Spiciness Detection, UV Light Film

