सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की याचिका पर सुनवाई के लिए एक विशेष पीठ का गठन किया है। यह याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें मतगणना के दौरान केवल केंद्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू) के कर्मचारियों को पर्यवेक्षक नियुक्त करने के फैसले को चुनौती देने वाली टीएमसी की अपील खारिज कर दी गई थी।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ आज सुबह 10:30 बजे इस मामले की सुनवाई शुरू हो गई है । टीएमसी ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से इस मामले की जल्द सुनवाई की मांग की है। पार्टी का कहना है कि राज्य में विधानसभा चुनाव की मतगणना सोमवार सुबह से शुरू होने वाली है, ऐसे में यदि सुनवाई में देरी होती है तो याचिका का कोई महत्व नहीं रह जाएगा।
वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष एआईटीसी की ओर से अपनी दलीलें पेश करना शुरू किया। टीएमसी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मतगणना पर्यवेक्षकों के रूप में राज्य सरकार के कर्मचारियों को शामिल न करना अनुचित है। पार्टी का आरोप है कि यह निर्णय संवैधानिक प्रावधानों, विशेषकर अनुच्छेद 324 की भावना के अनुरूप नहीं है। साथ ही, उसने चुनाव आयोग पर मनमाने ढंग से काम करने और राज्य के कर्मचारियों की निष्पक्षता पर संदेह जताने का आरोप भी लगाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा ..
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा अपने 13 अप्रैल के परिपत्र का पालन करने का आश्वासन दिए जाने के बाद, जिसमें एआईटीसी के अनुसार मतगणना प्रक्रिया में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य सरकार के कर्मचारियों की तैनाती भी शामिल है, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कोई अलग आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने केवल इतना कहा कि वह निर्वाचन आयोग के वकील द्वारा दिए गए इस बयान को दोहराती है कि विवादित परिपत्र को लागू किया जाएगा। यदि एआईटीसी ने अपनी याचिका में उक्त परिपत्र को चुनौती दी थी, किंतु आज की सुनवाई के दौरान उसने केवल उसी परिपत्र के कड़ाई से पालन की मांग की।
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