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चीटियां कैसे करती हैं अंतिम संस्कार? जानिए ‘एंट कब्रिस्तान’ के पीछे की रहस्यमयी दुनिया

हम अक्सर सोचते हैं कि सिर्फ इंसान ही अपने मृत साथियों को सम्मान देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि चीटियां भी ऐसा करती हैं? आइए जानते हैं कि कैसे चीटियां अपने साथी का अंतिम संस्कार करती हैं।

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हम आमतौर पर सोचते हैं कि सिर्फ इंसान ही अपने मृत साथियों को सम्मान देते हैं, लेकिन असल में चीटियां भी ऐसा करती हैं। इसे ‘नेक्रोफोरेसिस’ कहा जाता है। इस प्रक्रिया में चीटियां अपने मृत साथी को संभालकर सुरक्षित जगह ले जाती हैं। यह दिखाता है कि उनका समाज कितना संगठित और अनुशासित है। छोटे-छोटे ये जीव न केवल मेहनती हैं, बल्कि अपनी कॉलोनी और साथी के प्रति जिम्मेदार भी हैं। आइए जानते हैं कि कैसे चीटियां अपने साथी का अंतिम संस्कार करती हैं।

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चीटियों की रहस्यमयी सामाजिक व्यवस्था

चीटियां सिर्फ मेहनती ही नहीं हैं, बल्कि बेहद संगठित समाज की भी मिसाल हैं। एक कॉलोनी में लाखों चीटियां रहती हैं, जिनमें वर्कर, सोल्जर और क्वीन के अलग-अलग काम होते हैं। हर चींटी को पता होता है कि उसे क्या करना है। जब किसी चींटी की मौत हो जाती है, तो बाकी सदस्य उसकी लाश को यूं ही नहीं छोड़ते। वे उसे संभालकर एक सुरक्षित जगह ले जाते हैं, जैसे उसका अंतिम संस्कार कर रहे हों। यह प्रक्रिया बहुत ही अनुशासित और गंभीर होती है, और इसे देखकर पता चलता है कि चीटियों का समाज इंसानों की तरह ही नियम और व्यवस्था पर चलता है।

क्या होता है ‘नेक्रोफोरेसिस’?

जब कोई चीटी मर जाती है, तो उसके शरीर से ओलेइक एसिड (Oleic Acid) नामक रासायनिक गंध निकलती है। बाकी चीटियों के लिए यह गंध “मौत का संकेत” होती है। वर्कर चीटियां इसे पाते ही तुरंत प्रतिक्रिया देती हैं। वे मृत साथी को अपने जबड़ों से उठाकर कॉलोनी से बाहर ले जाती हैं। धीरे-धीरे और चीटियां इस प्रक्रिया में शामिल हो जाती हैं, ठीक वैसे ही जैसे इंसानों की अंतिम यात्रा में लोग जुटते हैं। यह शव किसी भी जगह नहीं रखा जाता, बल्कि एक खास जगह पर रखा जाता है, जिसे वैज्ञानिकों ने ‘एंट कब्रिस्तान’ कहा है।

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क्यों जरूरी है यह अंतिम संस्कार?

एक चींटी कॉलोनी लाखों लोगों वाला एक छोटा शहर जैसा होती है। अगर मृत चीटियों को समय पर हटा नहीं दिया गया, तो उनका शरीर सड़कर फंगस और बैक्टीरिया फैला सकता है, जिससे पूरी कॉलोनी बीमार पड़ सकती है। इसलिए मृतक चीटियों को उठाकर सुरक्षित जगह पर ले जाना कॉलोनी की रक्षा का हिस्सा है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह आदत चीटियों में लगभग एक करोड़ साल से चली आ रही है। कुछ खास वर्कर चीटियों को “अंडरटेकर एंट्स” कहा जाता है, और उनका काम सिर्फ मृत साथियों को संभालना और कॉलोनी को साफ-सुथरा रखना होता है।

फेरोमोन्स से चलती है अंतिम यात्रा की ‘सूचना प्रणाली’

जब कोई चींटी मृत साथी को उठाती है, तो रास्ते में छोटे-छोटे रसायन यानी फेरोमोन्स छोड़ती है। ये संकेत बाकी चीटियों तक पहुंचते हैं और उन्हें बताते हैं कि किसी की मौत हुई है। इस तरह धीरे-धीरे कई चीटियां उस दिशा में जुटती हैं और लाश को लेकर कॉलोनी के बाहर एक निश्चित जगह पर जमा करती हैं। यही उनका ‘एंट कब्रिस्तान’ कहलाता है। यह नज़ारा दिखाता है कि प्रकृति में भी अनुशासन और संगठन कितनी गहराई से मौजूद है, जहां बिना किसी भावना के भी मृत साथी को सुरक्षित और सम्मानपूर्वक जगह पर रखा जाता है।

Keywords: Ant Cemetery, Oleic Acid, Undertaker Ants, Ant Behavior, Science Facts In Hindi, Insect World

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